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दिन में बिजली बनाएंगे, रात में वोल्टेज संभालेंगे सौर संयंत्र: एमपी की तकनीक देखने भोपाल पहुंचा ओडिशा का दल

Tue, 27 Oct 2026 06:13 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश में सौर संयंत्रों के इन्वर्टर से रात में भी बिजली ग्रिड का वोल्टेज नियंत्रित करने की तकनीक विकसित की जा रही है। ओडिशा सरकार का 16 सदस्यीय दल मैनिट भोपाल के 230 किलोवाट और विदिशा के 2 मेगावाट सौर संयंत्रों का अध्ययन करेगा। इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा संयंत्रों से बिजली उत्पादन के साथ ग्रिड की स्थिरता और बिजली की गुणवत्ता सुधारना है।
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भोपाल पहुंचा ओडिशा सरकार का 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 सौर ऊर्जा का इस्तेमाल अब सिर्फ बिजली बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। दिन में बिजली पैदा करने वाले सौर संयंत्रों के इन्वर्टर उपयुक्त तकनीकी व्यवस्था के साथ रात में भी बिजली ग्रिड का वोल्टेज नियंत्रित करने में मदद कर सकेंगे। मध्य प्रदेश में विकसित की जा रही इस तकनीक को समझने के लिए ओडिशा सरकार का 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भोपाल और विदिशा की पायलट परियोजनाओं का तकनीकी अध्ययन कर रहा है। 27 और 28 अक्टूबर के दौरान प्रतिनिधिमंडल मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट), भोपाल में स्थापित 230 किलोवाट के रूफटॉप सौर संयंत्र और विदिशा जिले के शामशाबाद स्थित 2 मेगावाट की पायलट परियोजना का अवलोकन करेगा। अधिकारी मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से भी चर्चा करेंगे।
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रात में कैसे काम आएंगे सौर संयंत्र?
आमतौर पर सूर्यास्त के बाद सौर संयंत्र बिजली उत्पादन बंद कर देते हैं। लेकिन उपयुक्त इन्वर्टर, प्लांट कंट्रोलर और सहायक विद्युत व्यवस्था की मदद से इन संयंत्रों का इस्तेमाल रात में भी ग्रिड के वोल्टेज प्रबंधन के लिए किया जा सकता है। इसके तहत इन्वर्टर प्रतिक्रियाशील विद्युत शक्ति को ग्रिड में भेजने या उससे अवशोषित करने में मदद करते हैं। यह तकनीक खासतौर पर उन ग्रामीण इलाकों के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां लंबी बिजली लाइनों, सौर ऊर्जा के अधिक उत्पादन और बिजली की मांग में बदलाव के कारण वोल्टेज में उतार-चढ़ाव होता है। पारंपरिक कैपेसिटर बैंक के मुकाबले इन्वर्टर आधारित व्यवस्था ग्रिड की बदलती परिस्थितियों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया दे सकती है। इसका उद्देश्य बिजली की गुणवत्ता सुधारना, वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाना और पहले से स्थापित सौर संयंत्रों से अतिरिक्त ग्रिड सहायता सेवाएं लेना है।
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नियामक आयोग के आदेश से मिली मंजूरी
इस पहल का अहम पहलू मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की ओर से विकेंद्रीकृत सौर परियोजनाओं के जरिए वोल्टेज सहायता सेवाओं के लिए नियामकीय ढांचे को स्वीकृति देना है। 15 जुलाई 2026 के आदेश में प्रतिक्रियाशील विद्युत शक्ति सेवाओं के लिए प्रोत्साहन और दंड की व्यवस्था शामिल की गई है।निर्धारित प्रावधान के अनुसार, वोल्टेज 0.97 पीयू से कम होने पर प्रतिक्रियाशील विद्युत शक्ति ग्रिड में भेजने और 1.03 पीयू से अधिक होने पर इसे अवशोषित करने को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए निर्धारित दर 0.05 रुपये प्रति किलोवोल्ट-एम्पियर प्रतिक्रियाशील घंटा है। सामान्य वोल्टेज सीमा में इस व्यवस्था के तहत न प्रोत्साहन दिया जाता है और न दंड लगाया जाता है। इस व्यवस्था से वोल्टेज प्रबंधन को एक मापने योग्य ग्रिड सेवा के रूप में विकसित करने और बिजली वितरण कंपनियों के लिए इसका व्यावहारिक इस्तेमाल बढ़ाने का रास्ता खुलता है।

भोपाल से विदिशा तक तकनीक का प्रदर्शन
मैनिट में मध्य प्रदेश शासन के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के सहयोग से स्थापित ऊर्जा रूपांतरण मिशन केंद्र इस तकनीक के अनुसंधान और व्यावहारिक उपयोग पर काम कर रहा है। प्रतिनिधिमंडल भोपाल में 230 किलोवाट के रूफटॉप सौर संयंत्र पर गतिशील वोल्टेज नियंत्रण और वोल्टेज-वीएआर संचालन का प्रदर्शन देखेगा। वहीं, विदिशा जिले के शामशाबाद स्थित 2 मेगावाट के संयंत्र में प्लांट कंट्रोलर आधारित वोल्टेज प्रबंधन, दूरस्थ निगरानी और रात में प्रतिक्रियाशील विद्युत शक्ति सहायता की व्यवस्था का अध्ययन किया जाएगा। ओडिशा के अधिकारियों की मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के साथ होने वाली बैठकों में तकनीक के नियामकीय पहलुओं, प्रोत्साहन व्यवस्था और इसे दूसरे राज्यों में लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
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बैटरी और बिजली नेटवर्क पर भी काम
ऊर्जा रूपांतरण मिशन केंद्र का काम केवल सौर इन्वर्टर से वोल्टेज नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है। केंद्र ऊर्जा भंडारण, सौर-बैटरी संयुक्त प्रणाली, विद्युत पारेषण लाइन की योजना और बिजली नेटवर्क की क्षमता के आकलन पर भी काम कर रहा है। बैटरी भंडारण प्रणालियों की क्षमता तय करने, ऊर्जा प्रबंधन और तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन के जरिए सौर ऊर्जा को बिजली नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र बिजली कंपनियों और नीति-निर्माताओं के लिए तकनीकी मानक, निर्णय-सहायक उपकरण और नियामकीय समाधान विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। इस पहल का नेतृत्व ऊर्जा रूपांतरण मिशन केंद्र और मैनिट के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग की डॉ. प्रियंका पालीवाल और डॉ. मुकेश किरार कर रहे हैं। ओडिशा के प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा मध्य प्रदेश में विकसित तकनीक को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने और सौर ऊर्जा संयंत्रों को बिजली उत्पादन के साथ ग्रिड की स्थिरता में भी उपयोगी बनाने की संभावनाओं को समझने का अवसर देगा।
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