परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की जमानत याचिका प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत ने खारिज कर दी है। बुधवार को सौरभ शर्मा के वकील ने कोई आपरधिक पृष्टिभूमि न होने का हवाला देकर जमानत देने की अपील की थी। बुधवार को सुनवाई के बाद अदालत ने फिर से सुनवाई की। गुरुवार को सुनवाई करने के बाद विशेष अदालत ने जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
सौरभ शर्मा के अधिवक्ता ने कहा कि जिस मामले को लेकर ईडी और अन्य जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं कि इनोवा कार में मिला सोना और नकदी किसकी है, उससे हमारे मुवक्किल सौरभ शर्मा का कोई संबंध ही नहीं है। बाकी किसी प्रकारण का आपराधिक प्रकरण पहले से विचाराधीन नहीं है। सभी जांच एजेंसियों को पूछताछ में सहयोग किया और आगे भी सहयोग करते रहेंगे।
वहीं, जमानत अर्जी का विरोध करते हुए ईडी के अधिवक्ता ने कहा कि कई ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब सौरभ शर्मा से पूछताछ में नहीं मिले हैं। ऐसे में शर्मा को जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद साक्ष्यों से छेड़छाड़ और उन्हें मिटाने का प्रयास हो सकता है। इसलिए जमानत मंजूर न की जाए। वहीं आयकर विभाग भी सौरभ शर्मा और उसके राजदार व बिजनेस पार्टनर चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल से पूछताछ करने की तैयारी में है।
उल्लेखनीय है कि 18 दिसंबर को लोकायुक्त पुलिस ने परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके बिजनेस पार्टनर चेतन सिंह गौर और शरदज जायसवाल के ठिकानों पर छापा मारा था। इसके बाद 19-20 दिसंबर की दरमियानी रात आयकर विभाग के अधिकारियों ने मेंडोरा के जंगल से चेतन सिंह गौर की इनोवा में 54 किलोग्राम सोना और दस करोड़ से अधिक की नकदी बरामद की थी। 27 दिसंबर को ईडी ने सौरभ और उसके करीबियों के ठिकानों पर छापा मारा था। लोकायुक्त और ईडी तीनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है। सौरभ शर्मा के अधिवक्ता राकेश पाराशर ने ऑन कैमरा तो कोई बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्र बताते हैं कि सौरभ शर्मा की जमानत के लिए जल्द ही जबलपुर उच्च न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।