मध्यप्रदेश में शिक्षकों की हाजिरी अब मोबाइल ऐप से दर्ज हो रही है, लेकिन इस व्यवस्था में तकनीकी दिक्कतें शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में नेटवर्क की समस्या, सर्वर की खराबी और ऐप में गड़बड़ी के चलते ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाने की शिकायतों के बीच शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने शिक्षा विभाग से व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। संगठन का कहना है कि जब तकनीकी खामी शिक्षक के नियंत्रण में नहीं है, तो उसका खामियाजा वेतन रोकने या काटने के रूप में नहीं भुगतना चाहिए। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर ई-अटेंडेंस प्रणाली में छह प्रमुख सुधार करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो प्रदेश के सभी क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुकूल हो। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में भौगोलिक स्थिति, आवागमन की कठिनाइयों और कमजोर नेटवर्क के कारण शिक्षकों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नेटवर्क या सर्वर की गलती पर वेतन नहीं कटे
शिक्षक संगठन की सबसे प्रमुख मांग तकनीकी खामियों के कारण प्रभावित होने वाली उपस्थिति और वेतन को लेकर है। संगठन चाहता है कि नेटवर्क नहीं मिलने, सर्वर ठप होने या ऐप में तकनीकी समस्या आने पर शिक्षक की हाजिरी को अमान्य न माना जाए। ऐसी स्थिति में स्कूल की उपस्थिति पंजी और संस्था प्रमुख द्वारा प्रमाणित अभिलेखों के आधार पर शिक्षक की उपस्थिति मान्य की जाए। संगठन ने मांग की है कि केवल तकनीकी कारणों से किसी शिक्षक का वेतन रोका या काटा नहीं जाए। हालांकि, ज्ञापन में वेतन कटौती के मामलों की संख्या या प्रभावित शिक्षकों का आंकड़ा नहीं दिया गया है। संगठन का जोर इस बात पर है कि तकनीकी व्यवस्था में गड़बड़ी की जिम्मेदारी शिक्षकों पर नहीं डाली जानी चाहिए।
छह तरह की परेशानियां, बदलाव की मांग
1. लॉगिन-लॉगआउट का समय बदले: संगठन ने सामान्य विद्यालयों के लिए सुबह 9:30 से 11 बजे तक लॉगिन और शाम 4 से 6 बजे तक लॉगआउट का समय निर्धारित करने की मांग की है। सुबह की पाली वाले स्कूलों के लिए लॉगिन का समय सुबह 6:30 से 8 बजे तक रखने का प्रस्ताव है।
2. छह घंटे की अवधि घटाकर पांच घंटे हो: ग्रामीण क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, आवागमन की कठिनाइयों और स्थानीय जरूरतों को देखते हुए ई-अटेंडेंस के लिए निर्धारित छह घंटे की अवधि घटाकर पांच घंटे करने की मांग की गई है।
3. सभी अवकाशों की ऑनलाइन सुविधा मिले: शिक्षक ऐप में सभी प्रकार के अवकाश दर्ज करने और उनका उपयोग करने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि छुट्टी की प्रक्रिया के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
4. आधे दिन की छुट्टी का विकल्प हो: संगठन ने पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जरूरत पड़ने पर आधे दिन का अवकाश लेने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। इससे आकस्मिक और व्यक्तिगत जरूरतों के समय शिक्षकों को राहत मिल सकेगी।
5. ऑन-ड्यूटी की मंजूरी आसान हो: प्रशिक्षण, बैठकों, शासकीय कार्यों और विभागीय दायित्वों के लिए ऑन-ड्यूटी स्वीकृत कराने की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि अनावश्यक जटिलताएं खत्म कर व्यावहारिक व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
6. तकनीकी खामी से उपस्थिति और वेतन प्रभावित न हो: ऐप, नेटवर्क या सर्वर की गड़बड़ी से हाजिरी दर्ज नहीं होने पर स्कूल की उपस्थिति पंजी और संस्था प्रमुख के प्रमाणित रिकॉर्ड को आधार बनाया जाए। तकनीकी समस्या के कारण वेतन नहीं रोका जाए और न ही कटौती की जाए।
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शिक्षा विभाग से सुधार की उम्मीद
उपेन्द्र कौशल ने कहा कि शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए लागू प्रणाली का व्यावहारिक, पारदर्शी और तकनीकी रूप से विश्वसनीय होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों को नेटवर्क और दूसरी तकनीकी समस्याओं के कारण मानसिक और आर्थिक परेशानी नहीं होनी चाहिए। संगठन ने लोक शिक्षण संचालनालय से ज्ञापन में शामिल मांगों पर विचार कर शिक्षक ऐप में जरूरी संशोधन करने और संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है। अब निगाहें शिक्षा विभाग के रुख पर हैं कि वह ई-अटेंडेंस से जुड़ी इन समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।