राजधानी के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल रानी कमलापति स्टेशन पर अब ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होने के बावजूद इस स्टेशन पर कई ट्रेनों का ठहराव सीमित है। इसकी बड़ी वजह ट्रेनों में पानी भरने यानी वॉटरिंग की व्यवस्था नहीं होना है। अब रेलवे ने इस कमी को दूर करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वॉटरिंग सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव रेलवे मुख्यालय से मंजूर हो गया है। इसके बाद रानी कमलापति स्टेशन पर भी ट्रेनों के ठहराव बढ़ाने का रास्ता साफ होगा। रेलवे की इस योजना का सीधा असर भोपाल स्टेशन पर यात्रियों के दबाव को कम करने के रूप में दिख सकता है। फिलहाल भोपाल स्टेशन पर रोजाना करीब 70 से 80 हजार यात्रियों की आवाजाही होती है। ज्यादातर ट्रेनों के ठहराव और पानी भरने की व्यवस्था के कारण यहां यात्रियों का दबाव बढ़ जाता है। बड़े धार्मिक आयोजनों और कार्यक्रमों के दौरान स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में ट्रेनों के ठहराव दोनों स्टेशनों पर बांटने की योजना बनाई गई है।
वॉटरिंग शुरू होते ही बढ़ेंगे ठहराव
सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया के मुताबिक, रानी कमलापति स्टेशन पर वॉटरिंग की सुविधा विकसित करने के लिए पिछले डेढ़ साल से विचार-विमर्श चल रहा था। अब प्रस्ताव पर मुख्यालय की सहमति मिल गई है और योजना पर अमल शुरू हो चुका है। यह व्यवस्था तैयार होने के बाद भोपाल स्टेशन पर पानी भरने के लिए रुकने वाली कुछ ट्रेनों को रानी कमलापति स्टेशन पर भी ठहराव दिया जा सकेगा। रेलवे की योजना सभी ट्रेनों को एक स्टेशन पर केंद्रित रखने के बजाय दोनों स्टेशनों के बीच ठहराव का संतुलित बंटवारा करने की है। कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों को रानी कमलापति स्टेशन पर ठहराव दिया जाएगा, जबकि भोपाल स्टेशन पर मौजूदा ठहराव भी जारी रहेंगे। इससे यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए दो विकल्प मिलेंगे और एक ही स्टेशन पर भीड़ का दबाव घटाने में मदद मिलेगी।
बड़े आयोजनों में यात्रियों को मिलेगी राहत
कटारिया के मुताबिक भोपाल स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ सामान्य दिनों में भी बड़ी चुनौती है। धार्मिक आयोजनों और देशभर से लोगों के पहुंचने वाले कार्यक्रमों के दौरान यह दबाव और बढ़ जाता है। ऐसे समय में ज्यादातर यात्री भोपाल स्टेशन पहुंचते हैं, क्योंकि अनेक ट्रेनों का ठहराव यहीं है। रेलवे इसी स्थिति को बदलने की तैयारी कर रहा है। आगामी सिंहस्थ को देखते हुए भी दोनों स्टेशनों की उपयोगिता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी होगा। रानी कमलापति स्टेशन पर अतिरिक्त ट्रेनों का ठहराव होने से यात्रियों को भीड़ के बीच एक ही स्टेशन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
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सांसद आलोक शर्मा ने भी दी सहमति
कटारिया के मुताबिक के अनुसार, रानी कमलापति स्टेशन की सुविधाओं का पूरा उपयोग करने के उद्देश्य से यह योजना तैयार की गई है। भोपाल के सांसद आलोक शर्मा ने भी इस पहल पर सहमति जताई है। रेलवे का मानना है कि वॉटरिंग सुविधा शुरू होने के बाद स्टेशन की उपयोगिता बढ़ेगी और इसे यात्री आवागमन के लिए अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकेगा। फिलहाल प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम वॉटरिंग व्यवस्था तैयार करना और उसके अनुरूप ट्रेनों के ठहराव तय करना है। हालांकि, किन ट्रेनों को रानी कमलापति स्टेशन पर रोका जाएगा और यह व्यवस्था कब से शुरू होगी, इसकी तारीख अभी स्पष्ट नहीं की गई है।