राहुल गांधी ने केन बेतवा लिंक परियोजना के मुआवजे पर सवाल उठाए हैं।
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश में केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के आंदोलन को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी जमीन, उचित मुआवजे और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग को लेकर जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल कर रहे आदिवासियों की आवाज सुनने के बजाय सरकार पुलिस बल के जरिए उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को दबा रही है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार सच और अहिंसक प्रतिरोध, दोनों से डरती है। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा परियोजना के लिए आदिवासियों की जमीन ली गई, लेकिन उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला और न ही सम्मानजनक पुनर्वास।
जल, जंगल और जमीन पर पहला हक आदिवासियों का
राहुल गांधी ने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं और जल, जंगल तथा जमीन पर पहला अधिकार उनका है। उनका आरोप है कि आज यही अधिकार उनसे छीना जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे आदिवासियों की मांग केवल इतनी है कि उन्हें सम्मानजनक आजीविका का साधन उपलब्ध कराया जाए।
यह भी पढ़ें-गौ सम्मान के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब, राष्ट्रमाता का दर्जा और गौ-हत्या पूर्ण प्रतिबंध की मांग
कांग्रेस आदिवासियों के साथ खड़ी है
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस आदिवासी भाइयों-बहनों के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा और पुनर्वास देना सरकार की जिम्मेदारी है और यह सुनिश्चित कराया जाएगा।
यह है पूरा मामला
गौरतलब है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से छतरपुर के 24 गांवों का विस्थापन होना है। आठ गांव डूब क्षेत्र में हैं। 16 गांव पन्ना टाइगर रिजर्व में शामिल किए जाएंगे। डूब क्षेत्र वाले गांवों में ज्यादा विरोध है। ग्रामीण विकसित ग्राम में भूखंड और 5 लाख रुपए मुआवजा मांग रहे हैं, जबकि प्रशासन 12.50 लाख रुपए दे रहा है। स्थानीय ग्रामीण इसके विरोध में पानी के अंदर चिता आंदोलन कर रहे थे। कूपी गांव के बराना नदी घाट से आंदोलनकारियों को 20 जुलाई की सुबह प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हटा दिया था। प्रशासन का कहना था कि लगातार बारिश और प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए कार्रवाई की गई।