भोपाल में रन फार मास्टर प्लान दौड़
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भोपाल का मास्टर प्लान लंबे समय से अटका होने का मुद्दा अब एक बार फिर सड़क पर आ गया है। मास्टर प्लान लागू कराने की मांग को लेकर बुधवार को 11 नंबर बस स्टॉप से रन फॉर मास्टर प्लान दौड़ आयोजित की गई। इसमें युवा, महिलाएं, छात्र, व्यापारी और शहर के अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हुए। दौड़ के जरिए सरकार तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की गई कि राजधानी को अब स्पष्ट विकास योजना का इंतजार नहीं कराया जाए। मध्य विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के नेतृत्व में आयोजित इस दौड़ में मास्टर प्लान लागू करने के साथ शहर की बदहाल सड़कों का मुद्दा भी उठाया गया। मसूद ने सरकार पर भोपाल के साथ दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि जब उज्जैन का मास्टर प्लान लागू हो सकता है तो भोपाल का मामला इतने साल से क्यों अटका है।
दो दशक से इंतजार, शहर में बढ़ती उलझन
मसूद ने कहा कि भोपाल का मास्टर प्लान करीब दो दशक से लंबित है। इसका असर शहर के विकास, जमीन के इस्तेमाल, निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि मास्टर प्लान नहीं होने से आम लोगों और कारोबारियों के सामने लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राजधानी के विकास को राजनीति से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। शहर के बच्चों, युवाओं, महिलाओं और व्यापारियों की मांग सिर्फ इतनी है कि भोपाल को स्पष्ट विकास योजना मिले।
मास्टर प्लान अटका तो सीलिंग ने बढ़ाई मुश्किल
भोपाल में मास्टर प्लान के लंबित रहने के बीच नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई भी बड़ा मुद्दा बन गई है। जमीन के इस्तेमाल और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्टता नहीं होने से व्यापारी और संपत्ति मालिक परेशान हैं। पुराने नियमों और न्यायालय के आदेशों के आधार पर हो रही कार्रवाई के बीच लोगों में यह सवाल बना हुआ है कि आने वाले समय में शहर का विकास किस स्पष्ट योजना के तहत होगा।
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अरेरा कॉलोनी की खोदी सड़कें भी बनीं मुद्दा
मसूद ने अरेरा कॉलोनी और आई-2 से आई-8 क्षेत्र की सड़कों का मुद्दा भी उठाया। सीवेज लाइन और दूसरे निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की मरम्मत जल्द कराने की मांग की गई। उनका कहना है कि गड्ढों और अधूरी सड़कों से रहवासियों को रोज परेशानी हो रही है। सड़क निर्माण का श्रेय किसे मिलेगा, इस पर मसूद ने कहा कि उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है। महापौर आएं या कोई और, लेकिन लोगों को सड़क चाहिए। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द सड़कों का निर्माण शुरू कराने की मांग की।
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कब मिलेगा भोपाल को मास्टर प्लान?
मास्टर प्लान की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोगों का कहना है कि भोपाल प्रदेश की राजधानी है और इसके विकास को लंबे समय तक असमंजस में नहीं रखा जा सकता। एक तरफ शहर में सीलिंग और निर्माण से जुड़े विवाद हैं, दूसरी तरफ सड़क, यातायात और विकास की समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में अब निगाह सरकार के अगले कदम पर है कि भोपाल का मास्टर प्लान कब लागू होगा और शहरवासियों को कब मिलेगी विकास की स्पष्ट तस्वीर।