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यूथ कॉन्क्लेव पर पीसीसी चीफ का हमला: रोजगार,भर्ती,पेपर लीक का उठाया मुद्दा,बोले-सरकार की पटवारी भी नहीं सुनते

Wed, 07 Oct 2026 04:07 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

जीतू पटवारी ने यूथ कॉन्क्लेव के बाद सरकार से एक लाख रोजगार की विभागवार जानकारी, भर्ती कैलेंडर और खाली पदों का ब्योरा मांगा। उन्होंने पेपर लीक, शिक्षक पदों, रोजगार मेलों, कर्ज, संघ से जुड़ी नियुक्तियों और कार्यक्रम में पुलिस कार्रवाई के आरोपों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
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पीसीसीसी चीफ जीतू पटवारी की प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पर युवा नीति, रोजगार, भर्ती, पेपर लीक, कर्ज और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में बस में आग लगने की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे ‘खटारा बस परियोजना’ बताया। पटवारी ने कहा कि युवाओं के लिए योजनाएं सिर्फ घोषणा न रहें, इसके लिए सरकार को स्पष्ट रोडमैप देना चाहिए। पटवारी ने मुख्यमंत्री की अगले वर्ष एक लाख युवाओं को रोजगार देने की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पहले ढाई लाख और पांच लाख रोजगार देने की बात कर चुकी है। उन्होंने पूछा कि एक लाख नौकरियां किन विभागों में, कितने पदों पर और कब तक दी जाएंगी। रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बाकी युवाओं के लिए सरकार की योजना बताने की मांग की। उन्होंने सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली होने का दावा करते हुए शिक्षक भर्ती समेत विभागवार रिक्त पद और भर्ती कैलेंडर जारी करने को कहा। साल में दो बार लोक सेवा आयोग की परीक्षा कराने की घोषणा पर पटवारी बोले कि परीक्षा दो बार कराने से ज्यादा जरूरी भर्ती पूरी करना है। कितने पद खाली हैं और नियुक्तियां कब होंगी, यह बताया जाए। उन्होंने पिछली परीक्षाओं के परिणाम में देरी का भी मुद्दा उठाया।
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तीन लाख शिक्षक पद खाली होने का दावा
पटवारी ने स्कूल-कॉलेजों में करीब तीन लाख शिक्षक पद खाली होने और शिक्षकों के आंदोलन का दावा किया। विश्वविद्यालयों में भी रिक्त पद होने की बात कही। उन्होंने कहा कि युवा वर्ष घोषित करने से पहले शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों का समाधान होना चाहिए। पेपर लीक पर उन्होंने कहा कि युवा परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन यूथ कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने व्यापमं का नाम बदलने के बावजूद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल बने रहने की बात कही। इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए पटवारी ने कहा कि ये राहुल गांधी के नहीं, छात्रों और युवाओं के सवाल हैं।

कॉन्क्लेव नहीं, करियर में चार चांद लगाने का प्रयास
पटवारी ने कहा, यह कॉन्क्लेव नहीं था, अपने खुद के करियर में चार चांद लगाने का प्रयास था। उन्होंने जुबिन नौटियाल के कार्यक्रम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रस्तुति के बाद मुख्यमंत्री का भाषण और फिर प्रस्तुति हुई, जबकि युवाओं के मुद्दों पर चर्चा कम हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में एक युवती के बाल खींचकर उसे बाहर निकाला गया और संबंधित पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पटवारी ने कहा कि जुबिन अच्छे कलाकार हैं और वे खुद भी कार्यक्रम सुनना चाहते थे, लेकिन उन्हें आशंका थी कि उनके आने को राजनीतिक विरोध माना जाएगा।
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रोजगार मेले और कर्ज पर भी सवाल
पटवारी ने रोजगार मेलों पर खर्च और उनसे मिली नौकरियों का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश पर 5.68 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है और आरोप लगाया कि सरकार कर्ज लेकर आयोजन व योजनाएं चला रही है। कर्ज लेने में कमीशन और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए, हालांकि इनके समर्थन में कोई विशिष्ट दस्तावेज पेश नहीं किया। उन्होंने सरकारी संस्थाओं में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों की नियुक्तियों का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर इनकी जांच कराई जाएगी। पटवारी ने प्रशासन पर भी सवाल उठाया और कहा, जिस सरकार की पटवारी नहीं सुनते, वो खटारा नहीं तो क्या है? उन्होंने स्वामित्व योजना के निर्देशों का पालन नहीं होने पर पटवारियों के निलंबन का हवाला दिया।भर्ती का स्पष्ट रोडमैप जारी करने की मांग करते हुए पटवारी ने कहा, नकल में भी अकल चाहिए। अंत में उन्होंने कहा, ‘25 साल की इस खटारा सरकार के दिन लद गए हैं।
 
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