मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए रक्षा एवं अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ी संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं। संस्थान ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), एरोनॉटिक्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट बोर्ड (एआरएंडडीबी) और देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के साथ अनुसंधान सहयोग को नई गति देने की पहल की है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब मैनिट के छात्र केवल किताबों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि देश की सामरिक जरूरतों से जुड़े अत्याधुनिक अनुसंधान और तकनीक विकास का हिस्सा बनने का मौका भी पा सकेंगे।
नई तकनीकों के विकास में योगदान देने के अवसर बढ़ेंगे
इस पहल के तहत मैनिट के शोधकर्ताओं और डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद हुआ। इसमें रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं तैयार करने, बाहरी वित्तपोषण प्राप्त करने और लंबे समय तक चलने वाले शोध सहयोग पर चर्चा हुई। इससे मैनिट के विद्यार्थियों को डीआरडीओ और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों में इंटर्नशिप, संयुक्त शोध, विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में काम करने और नई तकनीकों के विकास में योगदान देने के अवसर बढ़ेंगे।
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करियर और रिसर्च दोनों को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सहयोग से छात्रों को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर काम करने का अनुभव भी मिलेगा। इससे उनका शोध स्तर बेहतर होगा और रक्षा, अंतरिक्ष, विमानन तथा उच्च तकनीकी उद्योगों में रोजगार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। वहीं संस्थान के शिक्षकों को भी करोड़ों रुपये की बाहरी अनुसंधान परियोजनाएं हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा।
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रिसर्च फंड में छह गुना से ज्यादा बढ़ोतरी
मैनिट का अनुसंधान लगातार मजबूत हो रहा है। पिछले तीन वर्षों में संस्थान की वार्षिक प्रायोजित अनुसंधान निधि करीब 5 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 32 करोड़ रुपये हो गई है। अब डीआरडीओ, इसरो, भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के साथ बढ़ता सहयोग इस फंड को और बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है। इससे नई प्रयोगशालाएं, आधुनिक उपकरण और अत्याधुनिक शोध सुविधाएं विकसित होने की संभावना है।