राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो के मध्यप्रदेश प्रवास के दौरान जबलपुर जिले के शहपुरा थाने में किए गए औचक निरीक्षण को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कानूनगो ने बताया कि निरीक्षण के दौरान थाने में अधिकांश पुलिस स्टाफ नदारद मिला। मौके पर केवल दो पुलिसकर्मी मौजूद थे, जबकि हवालात में बंद बंदियों का रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं था। कानूनगो ने बताया कि जब उन्होंने संबंधित दस्तावेज और रजिस्टर मांगे, तो सब इंस्पेक्टर महेंद्र जाटव को बुलाया गया। इस पर उन्होंने निरीक्षण में सहयोग करने से इंकार कर दिया और कहा कि बिना पूर्व सूचना के आप थाने में नहीं आ सकते।
इस पूरे मामले को लेकर प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए मध्यप्रदेश के डीजीपी को टैग किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि शहपुरा थाने में न तो पूरा स्टाफ मौजूद था, न ही हवालात का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया। यह अत्यंत गंभीर स्थिति है। सूत्रों के अनुसार, कानूनगो का यह औचक निरीक्षण थानों में मानवाधिकार संबंधी प्रावधानों के पालन की समीक्षा के तहत किया गया था। उन्होंने कहा कि निरीक्षण में सहयोग न करना न केवल अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाता है, बल्कि मानवाधिकार आयोग की कार्यप्रणाली को भी चुनौती देता है।