मध्यप्रदेश में मौसम ने अब पूरी तरह करवट ले ली है। आंधी-बारिश का दौर थमते ही प्रदेश में गर्मी तेजी से बढ़ने लगी है। शुक्रवार के आंकड़ों में साफ दिख रहा है कि कई शहरों में तापमान 35 से 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि कहीं भी बारिश दर्ज नहीं हुई। सबसे ज्यादा गर्म नर्मदापुरम रहा, जहां पारा 39.3°C तक पहुंच गया। इसके अलावा रतलाम (38.6°C) और खरगोन (38°C) भी तेज गर्मी की चपेट में रहे। भोपाल में अधिकतम तापमान 34.6°C, इंदौर में 35°C और ग्वालियर में 33.4°C दर्ज किया गया।
पूरे प्रदेश में ‘ड्राई डे’, बारिश पूरी तरह गायब
पश्चिम और पूर्व मध्यप्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में पिछले 24 घंटे में बारिश शून्य रही। यानी अब मौसम पूरी तरह शुष्क हो चुका है और आने वाले दिनों में भी बारिश के आसार नहीं हैं। हालांकि दिन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन रात के तापमान में अभी ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। कई शहरों में न्यूनतम तापमान 17 से 22 डिग्री के बीच बना हुआ है, जिससे रात में हल्की राहत महसूस हो रही है।
नमी घटी, गर्मी का असर बढ़ेगा
शाम के समय ज्यादातर शहरों में ह्यूमिडिटी 15% से 30% के बीच दर्ज की गई, जो संकेत है कि हवा में नमी कम हो रही है। इससे आने वाले दिनों में गर्मी और ज्यादा तीखी महसूस होगी। जबलपुर, सतना, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा जैसे शहरों में भी तापमान 34 से 36°C के बीच रहा। यानी पूरे प्रदेश में एक साथ गर्मी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है।
9 दिन बाद खत्म हुआ राहत वाला दौर
अप्रैल की शुरुआत इस बार अलग रही। जहां आमतौर पर इस समय तक तेज गर्मी पड़ने लगती है, वहीं इस साल 1 से 9 अप्रैल तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आंधी, बारिश और ओलों का असर बना रहा। लगातार एक्टिव रहे साइक्लोनिक सर्कुलेशन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस ने गर्मी पर ब्रेक लगा दिया था। गुरुवार को भी पूर्वी मध्यप्रदेश के उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में मौसम बदला हुआ नजर आया। कहीं तेज आंधी चली तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई।
यह भी पढ़ें-
गेहूं खरीदी में देरी को लेकर भोपाल में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन,कलेक्टर ऑफिस का किया घेराव
15 अप्रैल को नया सिस्टम, असर कम
मौसम विभाग के अनुसार, 15 अप्रैल के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होगा, लेकिन इसका असर मध्यप्रदेश में सीमित ही रहेगा। ऐसे में गर्मी से राहत की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है।मौसम विभाग मानता है कि जैसे सर्दी के लिए दिसंबर-जनवरी और बारिश के लिए जुलाई-अगस्त अहम होते हैं, वैसे ही गर्मी के लिए अप्रैल और मई सबसे महत्वपूर्ण महीने हैं। इस बार मार्च के दूसरे पखवाड़े में ही तापमान 41°C के पार पहुंच गया था, लेकिन बाद में मौसम बदलने से गर्मी की रफ्तार थम गई थी।
यह भी पढ़ें-
सिटीजन फीडबैक के साथ 45 दिन का सर्वे कल से, सेकंड रैंक बचाने की चुनौती
बार-बार बदला मौसम, फसलों को नुकसान
इस साल फरवरी और मार्च में चार-चार बार मौसम बदला। कई जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान हुआ। गेहूं, पपीता और केले की फसलें प्रभावित हुईं। मार्च के आखिरी और अप्रैल के पहले पखवाड़े में भी बारिश का सिलसिला जारी रहा। मौसम अब अपने पुराने ट्रेंड पर लौट रहा है। बारिश का दौर थमते ही तेज धूप और गर्म हवाएं असर दिखाने लगेंगी। आने वाले दिनों में लू चलने की स्थिति भी बन सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होगा।