मध्य प्रदेश में फरवरी में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। सक्रिय हुए नए सिस्टम के असर से भोपाल-उज्जैन सहित 25 जिलों में बारिश और तेज आंधी का दौर चला। कई जगह ओलावृष्टि की भी खबरें हैं, जिससे खेतों में खड़ी फसलें आड़ी हो गईं और किसानों की चिंता बढ़ गई।
24 घंटे में इन जिलों में असर
भोपाल, उज्जैन, धार, श्योपुर, शिवपुरी, इंदौर, आगर-मालवा, राजगढ़, खरगोन, मुरैना, सीहोर, दतिया, ग्वालियर, गुना, रतलाम, बड़वानी, मंदसौर, शाजापुर, देवास, विदिशा, अशोकनगर, टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर सहित 25 जिलों में बारिश दर्ज की गई। श्योपुर में करीब 1 इंच पानी गिरा, जबकि यहां आंधी की रफ्तार 63 किमी प्रतिघंटा तक पहुंची। भोपाल और सीहोर-आगर में 37 किमी, शाजापुर में 35 किमी, गुना में 31 किमी और राजगढ़ में 30 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चली।
खेतों में फसलें गिरीं, दानों की गुणवत्ता पर असर
बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से कई जिलों में गेहूं व अन्य रबी फसलें खेतों में झुक गईं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दानों की गुणवत्ता और पैदावार पर असर पड़ सकता है। कुछ क्षेत्रों में ओलों से भी नुकसान की सूचना है।
सबसे ठंडा रहा खजुराहो
प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान खजुराहो में 9.2°C दर्ज किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में 10.0°C और पचमढ़ी में 10.2°C तापमान रिकॉर्ड हुआ।
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सरकार ने दिए सर्वे के निर्देश
कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का आकलन कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी ओलावृष्टि या तेज बारिश से नुकसान हुआ है, वहां नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। अधिकारियों को पारदर्शिता के साथ सर्वे पूरा करने को कहा गया है ताकि किसानों को राहत में देरी न हो।
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आगे का पूर्वानुमान
20 फरवरी को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के जिलों में बारिश और आकाशीय बिजली की आशंका है। 21 फरवरी से मौसम साफ होने के संकेत हैं और फिलहाल उसके बाद किसी बड़े सिस्टम की चेतावनी नहीं है। लगातार बदलते मौसम के बीच किसानों और आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।