उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं के चलते मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है। रविवार-सोमवार की रात प्रदेश के अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में लगातार तीसरे दिन शीतलहर का असर देखने को मिला। यहां न्यूनतम तापमान 7.2 डिग्री रहा और सुबह से ही लोग ठंड से बचाव के उपाय करते नजर आए। उज्जैन में इस सीजन की अब तक की सबसे सर्द रात रही, जहां तापमान 9 डिग्री दर्ज हुआ। वहीं ग्वालियर में 8.9 डिग्री और जबलपुर में 8.3 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।
पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा,पारा 5.2 डिग्री पर पहुंचा
मौसम विभाग के अनुसार, रविवार-सोमवार की रात प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां पारा 5.2 डिग्री पर पहुंच गया। उमरिया में 5.6, इंदौर 5.7 डिग्री राजगढ़ में 6, नौगांव में 6.5, रायसेन में 7 और खजुराहो में 7.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। रीवा, मंडला, मलाजखंड, शिवपुरी, बैतूल, सतना, दमोह, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में भी कड़ाके की ठंड रही।
अगले दो दिन अलर्ट मोड पर मौसम विभाग
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को भोपाल, सीहोर, राजगढ़ और शाजापुर में तेज सर्द हवाओं के साथ शीतलहर का असर रहेगा। वहीं सोमवार को भोपाल, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, सिवनी और शहडोल में कोल्ड वेव की स्थिति बन सकती है। ठंडी हवाओं की रफ्तार बढ़ने से ठिठुरन और बढ़ने की संभावना जताई गई है।
पहाड़ों की बर्फबारी से बढ़ी ठंड
वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी और बारिश हुई है। इसके बाद पहाड़ों से निकलकर आने वाली बर्फीली हवाएं सीधे मध्यप्रदेश पहुंच रही हैं। पिछले दो दिनों से यही हवाएं प्रदेश में ठंड का असर बढ़ा रही हैं।
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इन संभागों में ठंड का सबसे ज्यादा प्रभाव
ग्वालियर, चंबल, उज्जैन और सागर संभाग बीते दो दिनों से सबसे ज्यादा ठंड की चपेट में हैं। उत्तर भारत से सीधे सर्द हवाएं आने के कारण इन इलाकों में दिन और रात दोनों समय तापमान औसत से नीचे बना हुआ है।
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दिसंबर-जनवरी में और बढ़ेगी ठंड
मौसम विभाग का कहना है कि इस साल ठंड का असर सामान्य से ज्यादा रहेगा। भोपाल में नवंबर में ही 84 साल पुराना रिकॉर्ड टूट चुका है, जबकि इंदौर में 25 साल में इतनी ठंड पहली बार दर्ज की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक दिसंबर और जनवरी ठंड के लिहाज से सबसे अहम महीने होते हैं और इस दौरान शीतलहर और मावठा दोनों का असर देखने को मिल सकता है।