बाहर करने के आदेश पर भड़के शिक्षक
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मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। प्रदेश के शिक्षा स्तर में सुधार लाने के लिए अब 30 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम लाने वाले अतिथि शिक्षकों नियुक्ति नहीं दी जाएगी। सरकार के इस आदेश पर प्रदेश भर के अतिथि शिक्षकों ने नाराजगी दर्ज कराते हुए कहा है कि छात्र-छात्राओं का परिणाम खराब होने के जिम्मेदार अतिथि शिक्षक नहीं, बल्कि सरकार की गलत नीतियां और स्कूल के प्राचार्य हैं।
गौरतलब है कि इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश जारी किया है। आदेश के प्रतिपालन में अलग-अलग जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी आदेश जारी कर रहे हैं। सरकारी स्कूल के परीक्षा परिणामों को लेकर संबंधित क्लास के साथ संबंधित विषय के अथिति शिक्षकों की रिपोर्ट तैयार करने की बात कही गई है। आदेश में सख्ती से लागू करने को कहा गया है। वहीं आदेश पालन नहीं होने पर संकुल प्राचार्य पर कार्रवाई होगी।
85 प्रतिशत अतिथि शिक्षकों का परीक्षा परिणाम अच्छा
अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने अतिथि शिक्षकों को खराब परीक्षा परिणाम के लिए दोषी ठहराने का विरोध करते हुए कहा है कि प्राचार्य खुद की और अन्य शिक्षकों की नाकामयाबी का ठीकरा अतिथि शिक्षकों पर फोड़ रहे हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री से निवेदन है कि सभी के परीक्षा परिणाम की समीक्षा करवाएं। 85 प्रतिशत अतिथि शिक्षकों का परीक्षा परिणाम बहुत अच्छा है, उनको पुरस्कृत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बीच सत्र में सीधी भर्ती प्रमोशन और ट्रांसफर करने से भी ऐसी स्थिति बनी है, जिन अतिथि शिक्षकों का परीक्षा परिणाम 30 प्रतिशत से कम है, उनके विगत सत्रों का परीक्षा परिणाम भी देखा जाए और उनके सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। जुलाई से अप्रैल तक कार्यरत है या अतिथि शिक्षकों को तीन चार माह अध्यापन कार्य कराने का अवसर ही मिला है। इन सब बातों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
10 दिन में अतिथि शिक्षकों की तैयार होगी रिपोर्ट
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, 10 दिन के अंदर अतिथि शिक्षकों की रिपोर्ट तैयार होगी। आदेश के मुताबिक, जिस अतिथि शिक्षक के विषय या कक्षा का परीक्षा परिणाम 30 प्रतिशत से कम रहा हो, उन्हें किसी भी स्कूल में अतिथि शिक्षक के लिए आमंत्रित न किया जाए। स्कूलों में 30 फीसदी परीक्षा परिणाम देने वाले अतिथि शिक्षकों की दोबारा नियुक्ति नहीं होगी। इसको लेकर राज्य शिक्षा केंद्र ने गाइड लाइन जारी की है।