शिवराज सरकार की महत्वपूर्ण योजना लाड़ली बहना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। दरअसल, महिला एवं बाल विकास आयुक्त ने योजना को लेकर एक पत्र जारी किया है। इस पत्र को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने योजना पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शुरू हो गई 'पात्र' और 'अपात्र' की छंटनी।
बता दें कि शुक्रवार को महिला एवं बाल विकास आयुक्त ने 'लाड़ली बहना योजना' के तहत अजीब सा आदेश निकाला। इस आदेश में जिलों के कार्यक्रम अधिकारियों को 'पात्र हितग्राहियों' की सूची बैंकों को भेजने के लिए कहा गया है। जब पिछले चार-पांच महीनों से जिस सूची के आधार पर लाड़ली बहनों को आर्थिक मदद दी जा रही है, क्या वो पात्र हितग्राहियों की सूची नहीं है।
आगे नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस आदेश की भाषा संदेह उत्पन्न करती है कि सीएम मोहन यादव सरकार इस योजना में कुछ खुरपेंच करने वाली है। 'पात्र' और 'अपात्र' की पड़ताल करके ज्यादातर बहनों को योजना का लाभ देने से वंचित कर दिया जाए तो आश्चर्य नहीं किया जाना चाहिए। बीजेपी चुनाव जीत गई, शिवराज सिंह चौहान विदा हो गए, अब कुछ भी हो सकता है।
इधर, योजना को लेकर सिंघार के सवाल उठाते ही भाजपा बचाव में आ गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट किया कि विधानसभा में हुई चुनावी हार से लगता है कि कांग्रेस के नेताओं की बुद्धि भी मंद हो गई है। वो अभी भी गहरे सदमे से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। तभी तो वो राज्य सरकार के आदेश को भी ठीक से पढ़ व समझ नहीं पा रहे हैं। यह आदेश लाड़ली बहनों को नियत दिनांक 10 को भुगतान करने के लिए जारी किया गया है। इसमें कहीं भी छंटनी शब्द का उल्लेख नहीं है। कांग्रेस ये जान ले कि मुख्यमंत्री जी स्पष्ट कर चुके हैं कि कोई भी योजना बंद नहीं होगी। कांग्रेस को करारी हार से सबक लेते हुए अब तो झूठ बोलना बंद कर देना चाहिए। इसी झूठ के कारण जनता ने इन्हें हमेशा के लिए घर बैठा दिया है।
हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब लाड़ली बहन योजना को लेकर सवाल खड़े हुए हों। 16वीं विधानसभा के पहले सत्र में भी लाड़ली बहना को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को जमकर घेरा था। इस पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने खुद सफाई देते हुए कहा था कि प्रदेश की कोई भी योजना बंद नहीं होगी। अब एक बार फिर इस योजना पर प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं। बता दें, इस योजना में प्रदेश की करीब सवा करोड़ बहनों को 1,250 रुपये हर महीने 10 तारीख को खाते में दिए जाते हैं।