प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी
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मध्य प्रदेश कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पदभार ग्रहण करने के साथ ही नेताओं से मुलाकात शुरू कर दी है। चार माह बाद लोकसभा चुनाव हैं। जिसे नव निर्वाचित कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की परीक्षा के रूप में लिया जा रहा है। इसके रास्ते में उनके सामने पांच बड़े ब्रेकर हैं। इसमें पार्टी की गुटबाजी, दिग्गजों से सामंजस्य, कार्यकर्ताओं का सक्रिय करने जैसी बड़ी चुनौतियां हैं।
कांग्रेस की गुटबाजी को खत्म करना
कांग्रेस में विधानसभा चुनाव की हार के बाद तेजी से गुटबाजी सामने आई है। यह पहली बार नहीं है, कांग्रेस में गुटबाजी लंबे समय से है। इसे ही कांग्रेस की हार का कारण भी माना जाता रहा है। अब नव नियुक्त अध्यक्ष के सामने पार्टी के अंदर की गुटबाजी को खत्म करना सबसे बड़ी चुनौती है। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट कर तैयार करना होगा।
दिग्गजों में सामंजस्य बैठाना
प्रदेश कांग्रेस में कई बड़े दिग्गज को छोड़ युवा जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। पटवारी के सामने अब उन दिग्गजों को साथ लेकर और उनके साथ सामंजस्य बैठाना मुश्किल हो सकता है। हालांकि जीतू पटवारी ने पदभार ग्रहण करते ही वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करना शुरू कर दिया है। यह देखना होगा कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे नेताओं के साथ सामंजस्य बैठाने में कितने सफल होते हैं।
जमीनी संगठन मजबूत करना
2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने पर नेता उसको संभाल नहीं सके और ना ही कार्यकर्ताओं को लाभ दिया। अब विधानसभा में हार से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा हुआ है और निराश है। बिना सत्ता के कांग्रेस का झंडा उठाने में कार्यकर्ता मुश्किल से राजी होगा। जीतू के सामने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने से लेकर संगठन को मजबूत करने की चुनौती होगी।
कांग्रेस की एकमात्र सीट बचाना
कांग्रेस के पास लोकसभा की 29 में से एकमात्र छिंदवाड़ा सीट है। यहां से कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ सांसद हैं। इस सीट को आगामी लोकसभा चुनाव में जीतने के लिए भाजपा जुट गई है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जीतू के सामने छिंदवाड़ा की सीट को बचाने के साथ ही प्रदेश की दूसरी सीट पर जीत दर्ज करने की भी होगी।
दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ चलना
पूर्व सीएम कमलनाथ दिल्ली के नेताओं के साथ नहीं चले। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने अनुसार सब किया। अब जीतू पटवारी को केंद्रीय नेतृत्व ने जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में उनके सामने यह भी चुनौती होगी कि वह प्रदेश के नेताओं के साथ ही दिल्ली के नेताओं के भी निर्देशों का पालन करने और उसे प्रदेश में लागू कराएं।