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MP News: 23 करोड़ का सरकारी गेहूं कहां गायब हुआ? 86 हजार क्विंटल अनाज खरीदी के बाद गोदाम नहीं पहुंचा,जांच शुरू

Sun, 05 Jul 2026 02:35 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश में सरकारी खरीद के बाद गेहूं परिवहन को लेकर बड़ा सामने आया है। प्रदेश में गेहूं खरीदी के बाद 23 हजार करोड़ का 86 हजार क्विंटल खरीदी गायब हो गया। अब इस मामले में मध्य प्रदेश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने जांच शुरू कर दी है। इस मामले में संबंधित जिलों के नागरिक आपूर्ति अधिकारियों को नोटिश जारी किए गए हैं। 
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मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में गेहूं परिवहन को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। समर्थन मूल्य पर खरीदा गया करीब 86 हजार क्विंटल गेहूं गोदामों तक नहीं पहुंचा। इसकी अनुमानित कीमत करीब 23 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मामला सामने आने के बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, विभिन्न खरीदी केंद्रों से गोदामों तक भेजे जाने वाले 86 हजार क्विंटल गेहूं में से बड़ी मात्रा का रिकॉर्ड मेल नहीं खा रहा है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि परिवहन के दौरान गेहूं कहां और किस स्तर पर गायब हुआ।
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विभाग के मंत्री के जिले से सबसे ज्यादा अंतर 
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक सबसे अधिक गेहूं सागर जिले से गायब बताया गया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के गोविंद सिंह सागर से आते हैं।  यहां करीब 14 हजार क्विंटल गेहूं का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा। इसके अलावा जबलपुर से 13 हजार क्विंटल, नरसिंहपुर से 7,300, विदिशा से 6,300, सतना से 5 हजार , आगर मालवा से 4,700, उज्जैन से 3,600 , राजगढ़ और शाजापुर से 3-3 हजार, रीवा से 2,800, रायसेन से 2,300, सिवनी से 2 हजार और अशोकनगर से 1,500 क्विंटल गेहूं की कमी दर्ज की गई है। 
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जांच के घेरे में परिवहन व्यवस्था
सरकारी व्यवस्था के तहत खरीदी केंद्रों से गेहूं गोदामों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों और परिवहन व्यवस्था की होती है। ऐसे में जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि गेहूं परिवहन के किस चरण में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर आया। वहीं,इस मामले में संबंधित जिलों के नागरिक आपूर्ति अधिकारियों को नोटिश जारी किए गए हैं।  

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जिम्मेदारी तय करने की तैयारी
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका तय की जाएगी। विभाग यह भी पता लगाएगा कि कहीं रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई है या परिवहन प्रक्रिया के दौरान किसी स्तर पर अनियमितता हुई है। इस मामले में विभाग का पक्ष जानने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के कमिश्नर भास्कर लक्षकार से संपर्क किया, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला। 
 
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