कृषि विवि के कुलगुरु अरविंद कुमार शुक्ला
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मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु अरविंद शुक्ला की नियुक्ति विवादों में घिर गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी नियुक्ति के समय तीन बच्चों की जानकारी छिपाई, जो मध्य प्रदेश सरकार के 2001 के दो-बच्चा नीति नियम के खिलाफ है। यह नियम सरकारी सेवाओं और पदों के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों पर लागू होता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, भाजपा सांसद भारत सिंह कुशवाह और ग्वालियर के विधायक सतीश सिकरवार ने राज्यपाल को पत्र लिखकर इस मामले की जांच और नियुक्ति रद्द करने की मांग की है। आरोप है कि शुक्ला की नियुक्ति इस नियम का उल्लंघन करते हुए की गई है। राज्यपाल ने इन आरोपों पर कुलगुरु से जवाब मांगा, जिसके बाद शुक्ला ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण दिया है। डॉ. अरविंद शुक्ला ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने समग्र आईडी में अपने तीनों बच्चों की जानकारी पहले ही दी थी। उनका यह भी कहना है कि वह प्रतिनियुक्ति पर हैं और उनकी मूल नियुक्ति केंद्र सरकार के अधीन है। शुक्ला ने यह दलील भी दी कि कुलगुरु का पद लोकसेवक की श्रेणी में नहीं आता। हालांकि उन्होंने राजभवन को जवाब भेज दिया है।
2022 में पांच साल के लिए की नियुक्ति
शुक्ला की नियुक्ति 28 अक्टूबर 2022 को की गई थी। उन्हें राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने पांच वर्षों के लिए कुलगुरु नियुक्त किया था। इस मामले में विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के नेता एकमत होकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों के नेताओं का कहना है कि यदि नियुक्ति में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो इसे अवैध घोषित किया जाना चाहिए। राजभवन के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव ने बताया कि मामले की जानकारी संबंधित फाइल देखने के बाद ही दी जा सकेगी।
क्या है 2001 का नियम?
मध्य प्रदेश सरकार ने 2001 में एक शासनादेश जारी किया था, जिसमें सरकारी सेवा के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों को अधिकतम दो बच्चों का पालन करने का निर्देश दिया गया था। यदि किसी के तीन से अधिक बच्चे होते हैं, तो वह सरकारी सेवाओं या पदों के लिए अयोग्य माना जाता है।