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MP News: फर्टीलाइजर बनाने के नाम पर फर्नीचर फैक्ट्री किराए पर ली और बनाने लगे रोज 25 किलो एमडी ड्रग्स

Sun, 06 Oct 2024 08:46 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल के कटरा हिल्स थाना क्षेत्र स्थित इंडस्ट्रीयल एरिया में फर्नीचर फैक्ट्री को 6 माह पहले किराए पर लिया था। जिसमें 25 किलोग्राम एमडी ड्रग्स प्रतिदिन बनाई जा रही थी। एजेसियों ने कार्रवाई में 900 किलोग्राम ड्रग्स और करीब 5000 हजार किलोग्राम ड्रग्स बनाने का पदार्थ बरामद किया है। 
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भोपाल में ड्रग्स फैक्ट्री पर बड़ी कार्यवाही - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र के बगरोदा औद्योगिक क्षेत्र में एमएस वास्तुकार के नाम से फर्नीचर बनाने के नाम पर प्लॉट लेकर फैक्ट्री बनाई गई और उसे किराए पर देकर ड्रग्स का कारोबार किया जा रहा था। फैक्ट्री संचालक ने फर्टिलाइजर बनाने के लिए छह माह पहले फैक्ट्री को किराये पर दिया था, लेकिन यहां एमडी ड्रग्स बनाई जा रही थी। गुजरात एटीएस और दिल्ली की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की टीम ने रविवार को संयुक्त रूप से कार्रवाई कर फैक्ट्री में ड्रग्स बनाने का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई में भोपाल पुलिस को एक भी सहयोग नहीं लिया गया। कार्रवाई शुरू करने के बाद एमपी पुलिस को छापेमारी का पता चला, हालांकि गुजरात सरकार ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग की सराहना की है। 
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अब उद्योगों का होगा सत्यापन
भोपाल पुलिस अब उद्योग विभाग के साथ मिलकर फैक्ट्रियों का वेरीफिकेशन करेगी कि जिस कार्य के लिए प्लॉट लिया गया है, वही कार्य हो रहा कि नहीं। इस मामले में मध्यप्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम (एमपीएकेवीएन) पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि फैक्ट्री छह माह से किराए पर चल रही है और मादक पदार्थ बनाया जा रहा, लेकिन प्लॉट देने वाले विभाग को पता ही नहीं। इस मामले में कई स्तर पर लापरवाही का खुलासा हुआ है। यह फैक्ट्री 'एमएस वास्तुकार' नाम से 908 वर्ग मीटर क्षेत्र में 2018 में फर्नीचर निर्माण के लिए शुरू की गई थी। जयदीप सिंह इसके प्रोपराइटर है, जिनका दावा है कि उन्होंने यह फैक्ट्री तीन साल पहले एसके सिंह नामक व्यक्ति को बेच दी थी। जयदीप सिंह का कहना है कि उन्होंने फैक्ट्री बेचने के बाद इसके संचालन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। 

लीज एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन
अमर उजाला ने पड़ताल कि तो सामने आया कि फैक्ट्री अभी भी एमपीएकेवीएन में जयदीप सिंह के नाम पर ही है। ऐसे में वह अपने आप को बचाने के लिए झूठ बोल रहे हैं या फिर उन्होंने फैक्ट्री की जगह को किराए पर दिया हो सकता है। यदि उनके द्वारा फैक्ट्री की जगह किराए पर किसी को दी गई। यह फैक्ट्री संचालन में लीज एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, लीज पर ली गई औद्योगिक भूमि को किराए पर नहीं दिया जा सकता। यह लीज शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है। एमपीएकेवीएन की निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्रियों की निगरानी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। औद्योगिक क्षेत्र में यह जिम्मेदारी होती है कि संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि फैक्ट्री अपनी तयशुदा गतिविधियों को ही संचालित कर रही है या नहीं। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि फैक्ट्री के अंदर निरीक्षण करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। एक साल पहले फैक्ट्री के चालू होने की जानकारी आसपास के फैक्ट्री संचालकों ने दी थी, लेकिन इसके बावजूद निरीक्षण में लापरवाही बरती गई। दरअसल उस दिन फैक्ट्री बंद थी। 
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रिकॉर्ड में पूर्व मालिक के ही नाम पर है फैक्ट्री
एमपीएकेवीएन के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक विशाल सिंह चौहान के अनुसार, फैक्ट्री अभी भी उनके रिकॉर्ड में जयदीप सिंह के नाम पर ही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि फैक्ट्री किसी अन्य को दी गई है, तो उसकी कोई सूचना एमपीएकेवीएन को नहीं दी गई है। विशाल सिंह ने यह भी कहा कि फैक्ट्री को फर्नीचर निर्माण के अलावा किसी अन्य कार्य के लिए उपयोग करने पर जयदीप सिंह को नोटिस जारी किया जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शनिवार दोपहर से टीम भोपाल में 
बगरोदा के प्लॉट नंबर 63 पर ड्रग्स फैक्ट्री को संचालित किया जा रहा था। इसके साथ तीन-चार अलग-अलग शेड में भी एमडी ड्रग्स बनाने का कच्चा माल तैयार किया जा रहा था। जिससे उन शेडों के संबंध में पता लगाया जा रहा है कि सभी शेड प्लॉट नंबर 63 के अंतर्गत आते हैं या नहीं। 

पूरी कार्रवाई गोपनीय रखी गई
गुजरात एटीएस और दिल्ली एनसीबी ने संयुक्त रूप से इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। यह पूरी कार्रवाई इतनी गोपनीय रखी गई कि भोपाल पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई है। शनिवार दोपहर से गुजरात एटीएस और दिल्ली एनसीबी की टीम भोपाल में है, लेकिन एमपी पुलिस के खुफिया विभाग तक को भनक नहीं लगी। शनिवार को ही भोपाल पुलिस आयुक्त हरिनारायण चारी मिश्रा ने दावे किए थे ड्रग्स को लेकर कड़ी सख्ती की जा रही है। 

25 किलोग्राम प्रतिदिन होता था उत्पादन
भोपाल की इस अवैध फैक्ट्री में प्रतिदिन 25 किलोग्राम एमडी ड्रग्स का उत्पादन किया जा रहा था। एक आरोपी भोपाल का रहने वाला है, जबकि दूसरा नासिक का है। नासिक निवासी सान्याल वाने अवैध मादक पदार्थों के मामले में जेल में रह चुका है। भोपाल के कोटरा सुल्तानाबाद निवासी अमित चतुर्वेदी के संबंध में भोपाल क्राइम ब्रांच जानकारी जुआ है।

भोपाल पुलिस भी कर रही जांच
भोपाल डीसीपी जोन-2 संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि भोपाल की पुलिस को सूचना थी। जब कार्रवाई शुरू हुई तब हमारे संबंधित थाने के प्रभारी फैक्ट्री के बाहर सुरक्षा में टीम के साथ तैनात थे। भोपाल पुलिस को अवैध फैक्ट्री का पता नहीं चला, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लापरवाही बरती गई है। दोनों आरोपियों के संबंध में भोपाल पुलिस भी जानकारी खंगालना शुरू कर दिया है। उद्योग विभाग के साथ प्लॉटों का सत्यापन किया जाएगा। संदिग्ध प्लॉटों के संबंध में विस्तृत जांच भी की जाएगी। यहां से ड्रग्स बनाने का कच्चा माल भी बरामद किया गया है। फर्टिलाइजर बनाने के नाम पर इस फैक्ट्री को किराए पर लिया गया था, इसलिए आसपास के लोगों को भी शक नहीं हुआ। भोपाल पुलिस अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है।
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