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MP News: बच्चों को हुनर सिखाने वाले खुद बेरोजगार,भोपाल में सैकड़ों व्यावसायिक प्रशिक्षकों का बेमुद्दत धरना

Mon, 29 Jun 2026 05:02 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को व्यवसायिक और कौशल आधारित शिक्षा देने वाले हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षक अपनी मांगों को लेकर भोपाल में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। प्रशिक्षकों का आरोप है कि 10 साल की सेवा के बाद भी उन्हें केवल 20 हजार रुपये मानदेय, न नौकरी की सुरक्षा, न 12 महीने का वेतन, न मातृत्व अवकाश और न अन्य वैधानिक सुविधाएं मिल रही हैं। 
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व्यावसायिक प्रशिक्षकों का विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को रोजगारपरक और कौशल आधारित शिक्षा देने वाले हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षक (Vocational Trainers) अब खुद अपने रोजगार और अधिकारों की लड़ाई लड़ने सड़क पर उतर आए हैं। नवीन व्यावसायिक शिक्षा प्रशिक्षक महासंघ के बैनर तले सोमवार से राजधानी भोपाल के आंबेडकर पार्क में प्रदेशभर से पहुंचे प्रशिक्षकों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। प्रशिक्षकों का आरोप है कि 10 वर्षों से लगातार सेवाएं देने के बावजूद उन्हें न स्थायी नौकरी मिली, न सम्मानजनक वेतन, न सामाजिक सुरक्षा और न ही वैधानिक अवकाश जैसी बुनियादी सुविधाएं।
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आर्थिक संकट में जीवन बिताने को मजबूर
आंदोलन में शामिल प्रशिक्षकों ने कहा कि वे स्कूलों में स्किल इंडिया योजना के तहत विद्यार्थियों को हुनरमंद बनाते हैं, लेकिन खुद आर्थिक संकट में जीवन बिताने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि कई-कई महीनों तक वेतन नहीं मिलता, हर साल टेंडर प्रक्रिया के नाम पर नौकरी असुरक्षित बनी रहती है और कई बार बिना किसी लिखित आदेश के केवल व्हाट्सएप संदेश भेजकर सेवा से अलग कर दिया जाता है। महासंघ के प्रदेश पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि भारत सरकार पूरे 12 महीने का बजट जारी करती है, लेकिन मध्य प्रदेश में प्रशिक्षकों से केवल 10 महीने काम लिया जाता है। वर्तमान में उन्हें सिर्फ 20 हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है, जबकि अन्य राज्यों में इससे कहीं अधिक वेतन मिल रहा है। प्रशिक्षकों ने वार्षिक वेतनवृद्धि लागू करने की भी मांग उठाई।
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महिला प्रशिक्षकों ने सुनाई पीड़ा
धरने में बड़ी संख्या में महिला प्रशिक्षक भी शामिल हुईं। महिला प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रदेश में करीब छह हजार महिला व्यावसायिक प्रशिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें मातृत्व अवकाश जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं मिलती। कई महिलाएं गर्भावस्था और ऑपरेशन के बाद भी आंदोलन में शामिल होने को मजबूर हुई हैं। उनका कहना है कि सरकार से वे कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि अपना वैधानिक अधिकार मांग रही हैं।
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ये हैं आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
- 12 महीने की सेवा और पूर्ण जॉब सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- सम्मानजनक वेतन वृद्धि और हर वर्ष 5 से 10 प्रतिशत वार्षिक इंक्रीमेंट लागू किया जाए।
- आकस्मिक अवकाश, मेडिकल लीव और सवैतनिक मातृत्व अवकाश की सुविधा दी जाए।
- व्यावसायिक प्रशिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए स्थायी विभागीय समिति बनाई जाए।

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सरकार तक पहुंचाई आवाज, समाधान नहीं
प्रशिक्षकों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों तक अपनी समस्याएं कई बार पहुंचा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं होता, तब तक भोपाल में अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।
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