मध्य प्रदेश में श्रीअन्न (मिलेट) के उत्पादन और उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2020-21 में जहां इसका रकबा 67 हजार हेक्टेयर था, वह वर्ष 2023-24 में बढ़कर 1.35 लाख हेक्टेयर रिकॉर्ड किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीअन्न उत्पादक किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए ऐतिहासिक फैसला लेते हुए रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना को लागू करने का फैसला किया है। मध्य प्रदेश में श्रीअन्न के विस्तार के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही मध्य प्रदेश राज्य मिलेट्स मिशन संचालित है। प्रदेश में 'श्रीअन्न प्रोत्साहन कंसोर्टियम ऑफ फॉर्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड’ के नाम से मिलेट फेडरेशन का पंजीयन भी कराया गया है। प्रदेश में वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष के रूप में व्यापक तौर पर मनाया गया। मिलेट्स के उत्पादन और उपयोग के प्रोत्साहन के लिए निरंतर कार्यक्रम किये जा रहे हैं।
प्रदेश में मिलेट फसलें जैसे कोदो-कुटकी, ज्वार-बाजरा, रागी आदि किसानों द्वारा उगाई जाती है। इनमें कोदो-कुटकी की खेती मुख्य रूप से अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों जैसे मंडला, डिंडौरी, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, छिंदवाड़ा आदि जिलों में की जाती है। रागी की खेती प्रदेश में डिंडोरी, मंडला, सिवनी और जबलपुर में व्यापक तौर पर की जाती है। प्रदेश के खरगोन, खंडवा, बड़वानी, छिंदवाड़ा, बैतूल, राजगढ़ और गुना जिले में ज्वार की खेती होती है। बाजरे की खेती मुख्य रूप से मालवा क्षेत्र में होती है। मिलेट्स की खेती मुख्यत: खरीफ ऋतु में की जाती है।