मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (मेपकॉस्ट) में अनुबंध खत्म होने के बाद भी नोटशीट पर समय बढ़ा कर काम कर रही महानिदेशक की चेहती सुरक्षा और हाउस कीपिंग एजेंसी को हटा दिया गया है। अमर उजाला ने 25 सितंबर को 'मेपकॉस्ट में बिना टेंडर सुरक्षा और हाउस कीपिंग पर डेढ़ करोड़ रुपये सालाना हो रहा भुगतान' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद आनन फानन में मेपकॉस्ट के महानिदेशक ने सात साल पुराने अनुबंध पर सुरक्षा और हाउस कीपिंंग का कार्य करने वाली दोनों एजेंसियों को तुरंत हटाने की कार्यवाही की। इसको लेकर मेपकॉस्ट की तरफ से आदेश जारी किया गया है। इसमें एजेंसी को 30 सितंबर 2024 से सेवाएं समाप्त करने की सूचना एजेंसी को दी गई है। वहीं, राज्य उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित से प्राप्त प्रस्ताव पर चर्चा कर सेवा उपार्जन समिति की बैठक बुलाई गई। इसके बाद राज्य उपभोक्ता संघ मर्यादित को सुरक्षा और हाउस कीपिंग का कार्य सौंप दिया गया।
अब खड़े हो रहे ये सवाल
मेपकॉस्ट में चार साल से नियम विरुद्ध सुरक्षा और हाउस कीपिंग एजेंसियों को सालाना लगभग 1.50 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा था। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अब तक नियम विरुद्ध तरीके से काम लेने और करोड़ों रुपये के भुगतान करने की जिम्मेदारी कौन लेगा? इन सब की गड़बड़ी का बड़ा कारण मेपकॉस्ट में कोष एवं लेखा से पदस्थ संयुक्त संचालक वित्त को दूसरे विभाग में तैनात करना था। इसके बाद परिषद में लेखा कक्ष का प्रभारी एक वैज्ञानिक को बना दिया गया।