सुप्रीम कोर्ट ने 17 साल से गुम नाबालिग अपराधी की तलाश करने के लिए राज्य सरकार को एसआईटी बनाने के आदेश दिए हैं। नाबालिग अपराधी के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद से ही वह नहीं मिल रहा है। राज्य सरकार सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर रही है।
जस्टिस अजय रस्तोगी और सीटी रविकुमार की बेंच ने मध्यप्रदेश सरकार को एसआईटी बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि हम राज्य सरकार को जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश देते हैं। इस कोर्ट के आदेश पर बनी एसआईटी ही आगे की जांच करेगी और स्टेटस रिपोर्ट देगी। इसका नेतृत्व आईजी स्तर का अधिकारी करेगा। शिकायतकर्ता का बेटा 17 साल से गुम है। इस मामले में संबंधित एजेंसियों ने सही तरीके से जांच नहीं की। जो आखिरी स्टेटस रिपोर्ट फाइल की गई थी, वह भी कागजी जमाखर्च ही है। उसमें यह ही बताया है कि पास के गांवों में सर्च वारंट निकले गए और उससे कुछ भी हासिल नहीं हुआ।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नाबालिग बेटा 17 साल से गुम है, जाहिर है कि सर्च वारंट से कुछ नहीं निकलना था। पास के गांवों में उसकी उपलब्धता सामान्य तौर पर हो ही नहीं सकती थी। कोर्ट ने कहा कि हर तारीख पर राज्य सरकार स्टेटस रिपोर्ट में कागजी खानापूर्ति कर देती है और हमें लगता है कि इससे कुछ सकारात्मक नहीं मिल रहा है।
यह है मामला
याचिकाकर्ता अत्तू ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी कि उसका नाबालिग बेटा 18 जनवरी 2005 को दर्ज एफआईआर में नामजद आरोपी था। तब से वह गुम है और मिल नहीं रहा है। यह अपराध आईपीसी की धारा 354, 506, 294 के तहत दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई थी। जिसे मई 2020 में खारिज कर दिया गया था।