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MP News: एमपीपीएससी ने अब SC में कहा-आरक्षण का निर्धारण राज्य सरकार का विषय, सरकार ने कल बुलाई सर्वदलीय बैठक

Wed, 27 Aug 2025 10:52 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

एमपीपीएससी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (एससी) में नया एफिडेविट फाइल कर कहा है कि आरक्षण का निर्धारण राज्य सरकार का विषय है। आयोग ने अपना पिछला एफिडेविट वापस ले लिया हैं। वहीं, राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लेकर गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में तेजी आती दिख रही है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दायर किया है। इसमें अब आयोग ने कहा है कि आरक्षण का निर्धारण करना राज्य सरकार का विषय है। आयोग को सरकार के नीतिगत निर्णयों का पालन करना है। आयोग ने अपने पिछले दिए गए हलफनामे को वापस यानी मोडीफाई करने को कहा है। इसमें उसने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण नहीं देने की बात कही थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जिसकी सुनवाई 23 सितंबर से रोजाना होगी। 
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सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक  
ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सरकार ने इस मुद्दे का हल निकालने के लिए 28 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक का उद्देश्य 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर व्यापक सहमति बनाना और आगामी कानूनी व प्रशासनिक कदम तय करना है। इस बैठक से पहले आयोग की तरफ से कोर्ट में आरक्षण को लेकर सरकार की नीतियों का पालन करने के नए एफिडेविट को ओबीसी वर्ग को उनका हक देने की दिशा में कदम माना जा रहा है। 
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कांग्रेस ने बैठक पर उठाए सवाल 
वहीं, सरकार के सर्वदलीय बैठक बुलाने पर कांग्रेस विधायक और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि बीते छह वर्षों से शिवराज सिंह चौहान और मौजूदा मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार की वजह से ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए अध्यादेश विधानसभा में लाया गया था, जो बाद में कानून का रूप ले चुका है। इसके बावजूद आरक्षण लागू नहीं हो सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री खुद कहते हैं कि वे ओबीसी आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, तब सर्वदलीय बैठक बुलाने की आवश्यकता ही क्या है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को अब और देरी नहीं करनी चाहिए बल्कि दो दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर मामला वापस लेना चाहिए, ताकि ओबीसी वर्ग को उनका हक मिल सके।
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27 प्रतिशत आरक्षण 6 साल बाद भी नहीं मिला
सरकार ने 2019 में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून बनाया था, लेकिन आरक्षण के कानूनी अड़चनों में फंसने के कारण यह नहीं दिया जा सका। इस मामले को लेकर ओबीसी महासभा और ओबीसी वर्ग के एमपीपीएससी में चयनित कुछ छात्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां अब मामले में सुनवाई हो रही है। बताया जा रहा है कि करीब 5000 अभ्यर्थी आयोग की अलग-अलग परीक्षाओं में चयनित होकर नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। 

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ओबीसी को कानून के अनुसार नियुक्ति देने को कहा
वहीं, ओबीसी महासभा के सुप्रीम कोर्ट में वकील वरुण ठाकुर ने कहा कि एमपीपीएससी ने पहले सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दिया था कि ओबीसी को आरक्षण नहीं दिया जाए। उन्होंने अब एफिडेविट दिया है कि यह राज्य सरकार का विषय है। उन्होंने अपने पहले हलफनामे को बदलने की बात कही है। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग की तरफ से मध्य प्रदेश के कानून में 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, जिसके अनुसार नियुक्तियां देने की बात कही है।
 
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