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MP News: विवाह, तलाक और उत्तराधिकार कानूनों का होगा अध्ययन, UCC के लिए मोहन सरकार ने बनाई हाई लेवल कमेटी

Mon, 27 Apr 2026 11:39 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने सोमवार को आदेश जारी कर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों का अध्ययन कर 60 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
 
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मध्य प्रदेश में यूसीसी के लिए हाई लेवल कमेटी गठित - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग के सोमवार को जारी आदेश के अनुसार यह समिति राज्य में वर्तमान में लागू विभिन्न व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। आदेश में कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में नागरिकों के बीच समानता, न्याय, सामाजिक समरसता और विधिक स्पष्टता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों से जुड़े कानूनों की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी के मद्देनजर यह समिति गठित की गई है। 
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सेवानिवृत्त जज रंजना देसाई करेगी अध्यक्षता 
समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। इसके अलावा समिति के अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त आईएएस  शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा, समाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह शामिल होंगे। इसके अलावा  सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव आईएएस अजय कटेसरिया समिति के सचिव रहेंगे। 
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इन विधियों का परीक्षण करेगी समिति 
समिति को राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विधियों का परीक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा, अन्य राज्यों, विशेष रूप से उत्तराखंड और गुजरात में अपनाए गए मॉडल और प्रक्रियाओं का अध्ययन, मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित कानूनी ढांचा सुझाना, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव लेना, जनसुनवाई और परामर्श बैठकें आयोजित करना, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों पर विचार करना, लिव-इन संबंधों के पंजीयन और उससे जुड़े अधिकारों पर सुझाव देना और प्रस्तावित कानून के विधिक और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा करना शामिल हैं। 

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60 दिन में सरकार को देनी होगी रिपोर्ट
आदेश के मुताबिक समिति परीक्षण के आधार पर ड्राफ्ट बिल (Draft Bill) और विस्तृत प्रतिवेदन राज्य सरकार को 60 दिनों के भीतर सौंपेगी। समिति के कार्य संचालन, सेवा शर्तों एवं अन्य प्रासंगिक विषयों के संबंध में अलग से आदेश जारी करने की बात आदेश में कही गई है। 
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