मध्य प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के आग्रह पर केंद्र सरकार ने प्रदेश में गेहूं उपार्जन की सीमा बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। अब राज्य में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि इस वर्ष प्रदेश में गेहूं उत्पादन बेहतर होने के कारण खरीदी की सीमा बढ़ाई जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो। मुख्यमंत्री के इस अनुरोध पर केंद्र सरकार ने सहमति जताते हुए नया लक्ष्य निर्धारित किया है।
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सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पहले तय सीमा 78 लाख मीट्रिक टन होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों को चिंता थी कि उनकी उपज समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जा सकेगी। अब लक्ष्य बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किए जाने से किसानों को राहत मिलेगी और अधिक मात्रा में गेहूं की खरीदी संभव हो सकेगी।
राज्य सरकार का कहना है कि इस फैसले से किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अधिक अवसर मिलेंगे और उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त होगा। साथ ही यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। प्रदेश सरकार ने संबंधित अधिकारियों को खरीदी व्यवस्था सुचारू बनाए रखने और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न होने देने के निर्देश भी दिए हैं।
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बता दें इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए 19.04 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 3 लाख अधिक है। अब तक 2.21 लाख किसानों से 95.17 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। इनमें से 75.57 लाख क्विंटल गेहूं का परिवहन भी हो चुका है। सरकार ने गेहूं बेचने वाले 1.06 लाख किसानों को अब तक 1091.33 करोड़ रुपए का भुगतान किया है।
हालांकि पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते गेहूं निर्यात कम हो रहा है। वहीं, बारदानों की समस्या के चलते सरकार ने जूट बैग, पीपी बैग और अन्य विकल्पों की व्यवस्था कर समस्या का समाधान कर लिया। सरकार का कहना है कि फिलहाल खरीदी के लिए पर्याप्त बारदाना उपलब्ध है। प्रदेश में किसानों से 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और 40 रुपए बोनस सहित कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है।