मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (मैपकास्ट) में 12वें राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के आयोजन के दौरान गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सवा करोड़ रुपये की लागत से आयोजित इस कार्यक्रम के टेंडर और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों में बैकडेट में प्रविष्टियां की गईं। इसके लिए जावक रजिस्टर में जानबूझकर जगह खाली छोड़ी गई, और जब सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी गई, तो चार महीने बाद जल्दबाजी में उसे भरा गया। इस गड़बड़ी की शिकायत लोकायुक्त से की गई है, और मामले की जांच की मांग की गई है। मैपकास्ट को 12वें राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के आयोजन की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसका आयोजन 22-26 अगस्त 2022 के बीच किया गया था। हालांकि, शिकायत के अनुसार, इस आयोजन से जुड़े टेंडर और भुगतान जैसे फैसले बैकडेट में लिए गए। पहले यह निर्णय लिया गया था कि फेस्टिवल का आयोजन मध्य प्रदेश माध्यम के माध्यम से किया जाएगा, लेकिन अचानक बिना किसी स्पष्ट कारण के यह निर्णय बदल दिया गया। इन आरोपों के प्रमाणों के साथ लोकायुक्त को शिकायत सौंपी गई है।
जावक रजिस्टर में बैकडेट एंट्री
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फेस्टिवल के समाप्ति के बाद जावक रजिस्टर में बैकडेट एंट्री की गई। जानकारी के अनुसार, 20 अगस्त 2022 की तारीख में जावक क्रमांक 1063 से 1072 तक की प्रविष्टियां 14 सितंबर 2022 के बाद दर्ज की गईं। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों और शिकायत के साथ जावक रजिस्टर के प्रमाण दिए गए हैं, जिनमें दिखाया गया है कि प्रविष्टियां बाद में कूट रचित ढंग से की गईं। आरोप लगाया गया है कि आर्थिक गड़बड़ी को छिपाने के लिए यह बैकडेट प्रविष्टियां की गईं।
आरटीआई से हुआ खुलासा
शिकायतकर्ता के अनुसार, पहले आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी को अस्पष्ट बताकर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद अपीलीय अधिकारी के पास अपील दायर की गई, लेकिन फिर भी जानकारी नहीं दी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जावक रजिस्टर की प्रविष्टियां कूट रचित ढंग से तैयार की गईं थीं।
लोकायुक्त से जांच की मांग
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त से इस मामले की जांच की मांग की है। जावक कक्ष के प्रभारी और अन्य संबंधित अधिकारियों से यह जांच की जा सकती है कि किसके दबाव में ये बैकडेट प्रविष्टियां की गईं।
आरोपों में कोई सच्चाई नहीं
मैपकास्ट के महानिदेशक, डॉ. अनिल कोठारी ने इन आरोपों को बेबुनियाद और झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायतों पर कार्यवाही शुरू होने के बाद ही ये झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जा रही है, जिससे संस्थान की छवि पर असर पड़ रहा है।