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MP News: जीतू पटवारी का नीट परीक्षा पर सवाल, बोले- लाखों बच्चों का भविष्य असमंजस में है, जवाब दे मोदी सरकार

Tue, 11 Jun 2024 06:04 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किए हैं। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार को देश को यह बताना ही चाहिए कि एक ही परीक्षा सेंटर पर छह टॉपर कैसे? क्योंकि टॉपर्स की मेरिट लिस्ट में आठ छात्रों के रोल नंबर एक ही सीरीज के हैं। 
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जीतू पटवारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नीट यूजी परीक्षा 2024 रिजल्ट को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार को घेर रही है। मध्यप्रदेश में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया है। उन्होंने कहा है डबल इंजन की सरकार को छात्रों के भविष्य को लेकर जवाब देना चाहिए। 

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जीतू पटवारी ने एक्स पर लिखा है कि प्रधानमंत्री जी डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर भर्ती परीक्षाओं तक यदि किसी प्रदेश में सबसे ज्यादा शर्मनाक दौर देखा है तो वह हमारा मध्यप्रदेश है। नीट के माध्यम से एक बार फिर देश के लाखों बच्चों का भविष्य गंभीर असमंजस का सामना कर रहा है। बीजेपी सरकार ही इसके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदार है। केंद्र सरकार को देश को यह बताना ही चाहिए कि एक ही परीक्षा सेंटर पर छह टॉपर कैसे? क्योंकि टॉपर्स की मेरिट लिस्ट में आठ छात्रों के रोल नंबर एक ही सीरीज के हैं।’

‘सीरियल नंबर 62 से लेकर 69 तक कुल आठ छात्र में से छह छात्रों ने रैंक-1 हासिल की। इन सभी को 720 में से 720 अंक मिले। इन सभी ने बहादुरगढ़ स्थित एक ही एग्जाम सेंटर पर परीक्षा दी थी। कैसे 718, 719 नंबर मिले? यह सवाल इसलिए कि कई छात्रों को 718, 719 अंक दिए गए। NTA ने कहा था कि उन्हें ये अंक ग्रेस मार्क्स के तौर पर दिए गए हैं। दरअसल, नीट का पेपर 720 अंक का होता है और नीट की तैयारी कर रहा बच्चा-बच्चा भी यह जानता है कि हर सवाल के चार अंक मिलते हैं। हर गलती के एक अंक कटते हैं। अब ऐसे में यदि कोई एक सवाल छोड़ देता है तो उसे 716 अंक मिलेंगे! यदि कोई सिर्फ एक सवाल गलत करता है तो उसे 715 अंक मिलेंगे। ऐसे में 718, 719 अंक पाना असंभव है?’
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ग्रेस मार्क्स जैसी सुविधा बिना जानकारी के क्यों लागू की गई?
पटवारी ने आगे पूछा कि ग्रेस मार्क्स जैसी सुविधा बिना जानकारी के क्यों लागू की गई? इसीलिए देश के लाखों स्टूडेंट्स अब बिना ग्रेस मार्क्स के NEET की ओरिजिनल मेरिट लिस्ट जारी करने की मांग कर रहे हैं। मांग तो ये भी है कि जिन सेंटरों पर ग्रेस मार्क्स दिए गए हैं, उनका नाम बताया जाए। पूछा तो यह भी जाना चाहिए कि ग्रेस मार्क्स पाने का आधार क्या है? कितना समय बर्बाद होने पर कितने नंबर दिए गए ? समय बर्बाद होने के कथित कारण कितने असली हैं? सेंटर्स पर इसकी निगरानी करने वाले कितनी ईमानदारी से इस व्यवस्था को देख और परख रहे थे? तीसरी बार, अविश्वास लगातार। जवाब दो मोदी सरकार?’

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