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MP News: भोपाल में फर्जी डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन पर नौकरी पाने वाले 9 डॉक्टरों पर FIR, जांच शुरू

Thu, 04 Jun 2026 10:37 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश में फर्जी मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में 9 और डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि दमोह फर्जी डॉक्टर रैकेट से जुड़े इस मामले में जल्द और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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मध्य प्रदेश एनएचएम कार्यालय भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। चूनाभट्टी थाना पुलिस ने फर्जी मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने और शासकीय धन प्राप्त करने के आरोप में 9 डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि जांच में धोखाधड़ी और जालसाजी साबित होने पर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। 
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यह कार्रवाई दमोह के चर्चित संजीवनी क्लीनिक मामले के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा कराई जा रही राज्यव्यापी जांच के तहत हुई है। एनएचएम के वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. राकेश बोहरे की शिकायत पर चूनाभट्टी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। 

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जांच के दौरान मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल (एमपीएमसी) ने जिन डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्रों का सत्यापन किया, उनमें 9 डॉक्टरों के दस्तावेज फर्जी और कूटरचित पाए गए। आरोपियों में डॉ. आकाश चंदेलकर, डॉ. मोहर सिंह, डॉ. कमल किशोर, डॉ. मोनिका, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. शांति साहू, डॉ. सोनम यादव, डॉ. बुद्धिमान और डॉ. पवन सोलंकी शामिल हैं। एसीपी आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल उपलब्ध शिकायत और जांच रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। अब पुलिस पूरे प्रकरण की विस्तृत विवेचना करेगी। जांच के दौरान आरोपियों द्वारा प्रस्तुत मेडिकल डिग्रियों और अन्य दस्तावेजों का भी सत्यापन कराया जाएगा। 

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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने मेडिकल काउंसिल द्वारा जारी मूल रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्रों की नकल कर उनमें केवल नाम बदलकर उनका उपयोग किया। अधिकारियों को आशंका है कि यह फर्जीवाड़ा केवल हाल के महीनों तक सीमित नहीं है और इससे पहले भी इसी तरह के मामले सामने आ सकते हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने और ठगी तथा जालसाजी के पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी सहित आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

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बता दें, मई माह में दमोह पुलिस ने दमोह और जबलपुर से तीन फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया था। इनके पास एमबीबीएस और मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के फर्जी दस्तावेज से संजीवनी क्लिनिक में नौकरी पाई थी। इस मामले की पूछताछ के बाद पुलिस ने भोपाल से मास्टर माइंड हीरा सिंह को गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ के बाद एनएचएम में पदस्थ आईटी असिस्टेंट को गिरफ्तार किया था। इस मामले में एनएचएम ने भी अपने स्तर पर जांच शुरू की थी, जिसके बाद फर्जी दस्तवेजों से सरकारी नौकरी पाने वाले नौ डॉक्टरों की पहचान हुई।
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