बारिश की बेरुखी के साथ ही देश भर में बिजली संकट गहरा गया है। अगस्त माह में अचानक बिजली की मांग और उत्पादन के अंतर मध्य प्रदेश में बिजली सप्लाई चरमरा गया। इसके चलते कई इलाकों में अघोषित कटौती के साथ ही सिंचाई के लिए 10 घंटे सप्लाई होने वाली बिजली में तीन घंटे की कटौती के आदेश जारी कर दिए गए। दरअसल, इन दिनों गर्मी बढ़ने और अल्प वर्षा होने से किसानों ने कुओं और ट्यूबवेल से फसलों सिंचाई शुरू कर दी है। इससे बिजली की मांग बढ़ गई। हालांकि, ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब मांग और उत्पादन के अंतर में संतुलन बना लिया है।उनका कहना है कि जल्द बारिश नहीं होने से भविष्य में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
1500 मेगावॉट बढ़ गई खपत, ऐसे किए इंतजाम
अगस्त माह में प्रदेश में 13 हजार मेगावॉट बिजली की आवश्यकता होती है। सिंचाई के लिए मोटर चलाने और गर्मी बढ़ने से अचानक बिजली की खपत 14500 मेगावॉट तक पहुंच गई। इससे बिजली की मांग और उत्पादन का संतुलन बिगड़ गया। इस संतुलन को बनाने के लिए सरकार को दूसरे राज्यों को बैकिंग के तहत दी जा रही 500 मेगावॉट बिजली हमें वापस मिल गई है। वहीं, एनटीसीपी से 300 मेगावॉट का उत्पादन बढ़ गया है। निजी बिजली संयंत्र जेपी बीना समेत दो यूनिट से भी 350 मेगावॉट बिजली मिल रही है। इसके अलावा सरदार सरोवर से 700 मेगावॉट बिजली मिलना शुरू हो गई है। दूसरे राज्यों से भी तीन रुपये से लेकर 10 रुपये यूनिट में बिजली खरीद रहे हैं।
ओवर फ्लो पानी से भी बना रहे बिजली
ओवर फ्लो होने वाले बांध के पानी से भी पन बिजली का निर्माण कर रहे हैं। इस तरह अभी हमने मांग और उत्पादन में संतुलन बना लिया है।
बारिश नहीं होने पर बढ़ेगी चुनौती
ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजीव दुबे ने बताया कि अचानक मांग बढ़ने से हमने संतुलन बैठाने के लिए लोड शिफ्ट किया है। साथ ही सिंचाई के लिए सप्लाई बिजली में कटौती की। अब संतुलन बना लिया है। राहत की बात है कि एक दो दिन में बारिश की संभावना जताई गई है। यदि बारिश नहीं होती है तो भविष्य में हमारे लिए चुनौती बढ़ जाएगी।
इन फसलों को हो रहा नुकसान
बारिश की खेंच व बिजली की कमी से खेतों में खड़ी फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। मक्का, धान, मूंगफली, सोयाबीन, अरहर, कपास, उड़द, मूंग की खरीफ फसलें सूख रही हैं। किसान फसलों की सिंचाई करने को लेकर परेशान हैं।