मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। एनजीटी के आदेश के खिलाफ पर्यटन विकास निगम की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने पहली ही सुनवाई में खारिज कर दिया। इसके साथ ही प्रदेश के तालाबों-नदियों में क्रूज व बोट चलाने की संभावनाएं खत्म हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने यह फैसला दिया। पर्यटन निगम ने अपनी याचिका में प्रदेश के तालाबों-नदियों में क्रूज और मोटर बोट चलाने की अनुमति मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने पर्यटन विकास निगम की अपील पर आश्चचर्य व्यक्त करते हुए कहा कि एनजीटी ने प्रदेश की वॉटर बॉडी को बचाने प्रयास किया है। निगम इस पहल के खिलाफ कैसे जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट पर्यटन विकास निगम के वकील के तर्कों से संतुष्ट नहीं हो सकी।
एनजीटी ने सितंबर 2023 में लगाई थी रोक
मध्य प्रदेश में एनजीटी ने 12 सितंबर 2023 को तालाब और नदियों में क्रूज और मोटर बोट चलाने पर रोक लगाई थी। इसमें भोपाल के बड़े तालाब, नर्मदा नदी समेत प्रदेश की किसी भी वॉटर बॉडीज यानी जल संरचना पर क्रूज और मोटर बोट के संचालन पर रोक लगा दी थी। एनजीटी ने डीजल इंजन से चलने वाले क्रूज और मोटर से जलीय जीवों को खतरा बताते हुए आदेश दिया था।
2022 में लगाई थी पर्यावरणविंद ने याचिका
पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी पांडेय ने प्रदेश के पीने का पानी लेने वाली वॉटर बॉडीज को संरक्षित करने के लिए 2022 में एनजीटी में याचिका लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सुभाष सी पांडेय ने कहा कि यह आदेश स्वागत योग्य है। यह आदेश देश के समस्त जल संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में मिल का पत्थर साबित होगा।