सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, भोपाल में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। भोपाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार और आरटीआई प्रकोष्ठ अध्यक्ष पुनीत टंडन ने संयुक्त रूप से प्रेस को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि बीते एक दशक में आरटीआई कानून को लगातार कमजोर किया गया है और यह अब नागरिकों की शक्ति का उपकरण न रहकर सूचना रोकने का माध्यम बनता जा रहा है।
यूपीए सरकार की एक ऐतिहासिक देन
प्रवीण सक्सेना ने कहा कि आरटीआई कानून यूपीए सरकार की एक ऐतिहासिक देन थी, जिसका उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाकर शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। लेकिन आज स्थिति ये है कि सूचना मांगने वालों को डराया-धमकाया जा रहा है और आयोगों को निष्क्रिय कर दिया गया है।”
2019 और 2023 के संशोधनों से कानून हुआ कमजोर
कांग्रेस नेताओं ने 2019 में हुए संशोधन और 2023 के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम को RTI के लिए घातक करार दिया। उन्होंने बताया कि 2019 के संशोधनों से सूचना आयुक्तों की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई, जबकि DPDP कानून की धारा 44(3) ने व्यक्तिगत जानकारी की परिभाषा इतनी व्यापक कर दी है कि अब जनहित की तमाम जानकारियाँ भी बाहर हो गई हैं। पुनीत टंडन ने कहा कि मतदाता सूची, एमपीएलएडी फंड, मनरेगा और राजनीतिक चंदों जैसी महत्वपूर्ण सूचनाएं अब निजी जानकारी बताकर रोकी जा रही हैं। यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने जैसा है।
सूचना आयोगों में रिक्तियां और बढ़ते लंबित मामले
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि सितंबर 2025 तक केंद्रीय सूचना आयोग में केवल दो आयुक्त कार्यरत हैं और मुख्य आयुक्त का पद रिक्त पड़ा है। देश भर में आरटीआई से जुड़ी 4 लाख से अधिक अपीलें और शिकायतें लंबित हैं। मिथुन अहिरवार ने कहा कि एक ओर सरकार पारदर्शिता की बात करती है, दूसरी ओर आयोगों को जानबूझकर निष्क्रिय बनाकर नागरिकों को सूचना से वंचित रखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना हो रही है।
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आरटीआई कार्यकर्ताओं पर बढ़ते हमले
कांग्रेस ने आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। भोपाल की शहला मसूद और महाराष्ट्र के सतीश शेट्टी जैसे कार्यकर्ताओं की हत्या को याद करते हुए नेताओं ने कहा कि आज भी आरटीआई उपयोगकर्ता धमकियों और हमलों के साए में जी रहे हैं। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि 2014 में पारित व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन अधिनियम आज तक लागू नहीं किया गया है, जिससे भ्रष्टाचार उजागर करने वालों की सुरक्षा अधर में है।
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कांग्रेस की प्रमुख मांगें
1. 2019 के संशोधनों को निरस्त कर सूचना आयोगों की स्वतंत्रता बहाल की जाए।
2. DPDP कानून की RTI विरोधी धाराओं को संशोधित किया जाए।
3. आयोगों में सभी रिक्त पद शीघ्र और पारदर्शी प्रक्रिया से भरे जाएं।
4. आयोगों की कार्यप्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित हो और निपटान दर सार्वजनिक की जाए।
5. व्हिसलब्लोअर कानून को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
6. आयोगों में सामाजिक विविधता लाई जाए।