मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े करीब तीन दशक पुराने पुनर्वास और पुनर्बसाहट व्यय विवाद का समाधान हो गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच हुए समझौते से मध्य प्रदेश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम हो गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि फरवरी 2026 में भारत के अटॉर्नी जनरल की राय के अनुसार पुनर्वास खर्च में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत तय हुई थी। इस आधार पर राज्य को गुजरात को करीब 1,500 करोड़ रुपये देने पड़ते। लेकिन चारों राज्यों के बीच आपसी सहमति से हुई बैठक में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी घटाकर 16.17 प्रतिशत कर दी गई। अब राज्य को केवल 231.80 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया।
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चारों राज्यों की नई हिस्सेदारी
समझौते के अनुसार सरदार सरोवर परियोजना में गुजरात की हिस्सेदारी 50.57 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 15.15 प्रतिशत से घटाकर 7.66 प्रतिशत और राजस्थान की हिस्सेदारी 2.31 प्रतिशत से घटाकर 1.17 प्रतिशत कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के तहत गुजरात को अन्य राज्यों से कुल 553.43 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।
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मध्य प्रदेश को मिल रहा बड़ा लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि नर्मदा और सरदार सरोवर परियोजना से बनने वाली कुल बिजली का 57 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश को मिलता है। अब तक प्रदेश को करीब 3,900 करोड़ यूनिट बिजली औसतन 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से मिल चुकी है। इसके अलावा इस परियोजना से प्रदेश में करीब 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिल रही है। साथ ही जबलपुर, कटनी, देवास, उज्जैन, इंदौर, धार सहित कई शहरों और पीथमपुर, देवास तथा विक्रम उद्योगपुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को भी नर्मदा का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता न केवल पुराने विवाद का स्थायी समाधान है, बल्कि राज्यों के बीच बेहतर सहयोग और विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।