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MP News: CM बोले- स्किल नई करेंसी,इनोवेशन नई इकोनॉमी; केंद्रीय संस्थानों ने बताया MP को नंबर-1 बनाने का रोडमैप

Mon, 24 Aug 2026 03:16 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल में आयोजित समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश को विकास के नए दौर में ले जाने के लिए कौशल और नवाचार पर जोर दिया। केंद्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों ने भी शिक्षा, तकनीक, रिसर्च, रोजगार और निवेश के जरिए मध्यप्रदेश को आगे बढ़ाने का रोडमैप साझा किया।
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भोपाल में केंद्रीय संस्थानों का सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश को वर्ष 2047 तक समृद्ध और विकसित राज्य बनाने के लिए सोमवार को राजधानी भोपाल में विशेषज्ञों और केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों ने मंथन किया। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ‘कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश@2047’ विषय पर राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव हुआ। इसमें अलग-अलग केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने प्रदेश के विकास में अपनी भूमिका और भविष्य की योजनाएं बताईं। कार्यक्रम का आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान ने किया। इसकी थीम ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ रखी गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया और ‘समृद्ध मध्यप्रदेश@2047’ स्मारिका का विमोचन किया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को उसकी क्षमता का अहसास कराया है। उन्होंने रामायण के जामवंत का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह जामवंत ने हनुमान को उनकी ताकत याद दिलाई थी, उसी तरह प्रधानमंत्री ने भारत को उसकी सामर्थ्य का एहसास कराया है। सीएम ने कहा कि आज मध्यप्रदेश में वे काम हो रहे हैं, जिनकी कुछ साल पहले कल्पना भी मुश्किल थी। प्रदेश में सेमीकंडक्टर यूनिट लग रही है। उन्होंने कहा कि अब राज्यों के पास आगे बढ़ने के समान अवसर हैं और सभी को मिलकर इनका फायदा उठाना होगा।

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खेती से युवाओं की दूरी बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि देश और मध्यप्रदेश कृषि आधारित हैं, लेकिन आज बहुत कम युवा खेती को अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। इसे बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने कृषि को आधुनिक तकनीक और बेहतर अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नदी जोड़ो परियोजनाओं से सिंचाई का क्षेत्र बढ़ेगा। मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच पानी से जुड़े पुराने विवाद का समाधान भी पीकेसी परियोजना के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। इससे दोनों राज्यों के कई जिलों में सिंचाई और विकास को गति मिलने की उम्मीद है। 

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स्किल को नई करेंसी बताया
सीएम  यादव ने कहा कि आने वाले समय में स्किल नई करेंसी और इनोवेशन नई इकोनॉमी होंगे। मध्यप्रदेश को रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उद्यमिता और नवाचार का केंद्र बनाने की जरूरत है। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार, निवेश और तकनीक के क्षेत्र में प्रदेश को आगे ले जाने पर जोर दिया। 
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2047 के लक्ष्य में सबकी भागीदारी जरूरी
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं होगा। इसमें उद्योग, संस्थान, सिविल सोसाइटी और आम नागरिकों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को ऐसा निवेश चाहिए, जिससे रोजगार और वैल्यू पैदा हो और मध्यप्रदेश राष्ट्रीय वैल्यू चेन का हिस्सा बने। 

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केंद्रीय संस्थानों ने रखे अपने प्लान
कॉन्क्लेव में केंद्रीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने प्रदेश के लिए अपनी योजनाएं साझा कीं। एनआईटीटीटीआर ने सेमीकंडक्टर तकनीक के लिए मध्यप्रदेश को बेहतर स्थान बताया। ट्रिपल आईटी भोपाल ने साइबर सिक्योरिटी और डेटा सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया। भारतीय सेना की ओर से ड्रोन तकनीक और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर काम करने की जरूरत बताई गई। मैनिट ने होम स्टे से जुड़े प्रशिक्षण, जबकि एलएनआईपी ने खेल और शारीरिक शिक्षा को बढ़ावा देने की योजना बताई। एम्प्री ने युवाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने और क्रिटिकल एलिमेंट्स पर रिसर्च में सहयोग की बात कही। रायसेन के जनकपुर गांव को स्मार्ट विलेज बनाने के लिए सीएसआर के तहत काम किया जा रहा है। अगले दो वर्षों में यहां करीब 4 से 5 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। इसके अलावा आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर, आयशर भोपाल और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के प्रतिनिधियों ने भी विकसित मध्यप्रदेश के लिए अपने सुझाव और योजनाएं सामने रखीं। सिंहस्थ 2028 में भी केंद्रीय संस्थानों और सीएसआर के सहयोग से काम करने की बात कही गई।
 
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