मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को कानून बनने के छह साल बाद भी सरकारी नौकरी में 27 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल पा रहा है। 2019 में कानून बनने के बाद आरक्षण में कानूनी अड़चनों के चलते आरक्षण देने पर रोक लग गई थी। इसके बाद से यह मामला हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इस पर सुप्रीम कोर्ट 23 सितंबर से रोजाना सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इस मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही ओबीसी को आरक्षण का लाभ देने को लेकर श्रेय लेने का दावा करते हैं। अब मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने बयानों में कहा कि उनकी सरकार ओबीसी वर्ग को उनका हक देने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने अब पहल करते हुए ओबीसी आरक्षण पर गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा बैठक में ओबीसी आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमारिया, मंत्री कृष्णा गौर और नारायण सिंह कुशवाह समेत अन्य प्रमुख नेता भी मौजूद रहेंगे। सरकार का उद्देश्य सभी दलों की राय और सुझाव लेकर रणनीति बनाना है। ताकि ओबीसी वर्ग को उनका हक दिलाया जा सके।