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MP News: 67वां कालिदास समारोह 1 नवंबर से,नवाचारों से सजेगा सांस्कृतिक महोत्सव,उज्जैन बनेगा कला का वैश्विक केंद

Sun, 26 Oct 2025 06:35 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

67वां अखिल भारतीय कालिदास समारोह 30 अक्टूबर से 7 नवंबर तक उज्जैन में नवाचारों और युवा सहभागिता के साथ आयोजित होगा। यह सांस्कृतिक अनुष्ठान कालिदास की कृतियों को जीवंत कर परंपरा और आधुनिकता का संगम प्रस्तुत करेगा।
 
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अखिल भारतीय कालिदास समारोह 1 नवंबर से - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छह दशकों से अधिक समय से अपनी अखंड परंपरा को जीवंत रखने वाला अखिल भारतीय कालिदास समारोह अब 67वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। 1958 से उज्जैन में आयोजित यह प्रतिष्ठित सांस्कृतिक अनुष्ठान 30 अक्टूबर से 7 नवंबर तक कालिदास संस्कृत अकादमी, मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न होगा। इस वर्ष पूर्वरंग, नवाचारों, लोकप्रिय आकर्षणों और युवा सहभागिता के साथ यह समारोह नई ऊंचाइयों को छुएगा, जो आयोजकों, कलाकारों, कला प्रेमियों और उज्जैनवासियों की सामूहिक सफलता का प्रतीक है।
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अकादमी निदेशक डॉ. गोविंद ने बताया कि देवप्रबोधनी एकादशी (1 नवंबर) से पूर्व 30-31 अक्टूबर को पूर्वरंग आयोजित होगा। 30 अक्टूबर को मां गढ़कालिका पर वागर्चन में शहर के 1100 छात्र-छात्राओं द्वारा श्यामलादंडकम् और देवी स्तुति की सामूहिक प्रस्तुति होगी। नृत्याराधना नृत्य मंदिर संस्थान द्वारा देवी स्तुति में नृत्य आराधना भी होगी। 31 अक्टूबर को पारंपरिक कलश यात्रा रामघाट से शुरू होकर अकादमी परिसर तक पहुंचेगी। इसमें छत्तीसगढ़ का पंथी नृत्य, नासिक के ढोल-ताशे, पुलिस बैंड, लोककलाकारों के नृत्य और गणमान्य नागरिक शामिल होंगे। टावर चौक पर कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी, जबकि शहर संगठन यात्रा का स्वागत करेंगे। सायंकाल रत्नागिरी (महाराष्ट्र) के युवा कलाकार संस्कृत आर्केस्ट्रा पेश करेंगे, जो आधुनिक वाद्यों पर संस्कृत गीतों का नवाचार होगा। पूर्व में कालिदास रचनाओं के मंगलाचरण का सामूहिक पाठ होगा।
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1 नवंबर को सुबह 10 बजे शुभारंभ होगा। सायंकाल राष्ट्रीय गायिका सूर्यागायत्री (कालीकट, केरल) भक्ति संगीत प्रस्तुत करेंगी। 2 नवंबर को सुबह कालिदास साहित्य में स्व-बोध पर शोध संगोष्ठी, सायंकाल प्रो. प्रगाग नारायण मिश्र (प्रयागराज) का व्याख्यान 'संस्कृति चिंतक कालिदास' और महेश काळे का शास्त्रीय गायन। 3 नवंबर को शोध संगोष्ठी जारी, प्रो. राजेश्वर मिश्र (कुरुक्षेत्र) का व्याख्यान 'कालिदास का परिवार चिंतन', अनन्या गौड़ का कथक, अमिता खरे की शकुंतला नाटिका और सांस्कृतिक समिति की ऋतुसंहार। 4 नवंबर को शोध संगोष्ठी, प्रो. संनंदन त्रिपाठी (दिल्ली) का व्याख्यान 'कालिदास का स्वात्म गौरव' और विशाला सांस्कृतिक समिति का हिंदी नाटक 'श्रीकृष्ण उज्जैनी'। 5 नवंबर को 'ऑपरेशन सिंदूर के आलोक में कालिदास' पर कवि सम्मेलन और पियाल भट्टाचार्य (कोलकाता) का संस्कृत नाटक 'शिवभाणकम्'। 6 नवंबर को श्रुति अधिकारी (भोपाल) का पंचनाद वादन, दुर्गा शर्मा (बेंगलुरु) का वायलिन और क्षेत्रीय बोली कवि सम्मेलन। 7 नवंबर को दिव्या शर्मा जांगीड़ (मुरैना) का शास्त्रीय गायन, प्रेमसिंह देपालपुरिया (सांरगपुर) का लोकगायन। समापन राज्यपाल मंगूभाई पटेल के मुख्य आतिथ्य में पुरस्कार वितरण के साथ होगा।

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समारोह में चार प्रदर्शनियां विशेष आकर्षण होंगी। पहली संस्कृत शब्दावली प्रदर्शनी (संस्कृत भारती के सहयोग से), दूसरी दुर्लभ ग्रंथ प्रकाशन, तीसरी विगत 10 वर्षों के पुरस्कृत चित्र और चौथी उज्जैन-मालवा पर पुरातत्व-सिक्कों की। दर्शक पुस्तकें खरीद सकेंगे, जो दैनिक जीवन में संस्कृत अपनाने को प्रेरित करेंगी। यह समारोह कालिदास की अमर कृतियों को जीवंत कर सांस्कृतिक एकता को मजबूत करेगा, युवाओं को जोड़ते हुए परंपरा को आधुनिक बनाएगा।

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