जिस भाजपा का आधार ही अनुशासन और वरिष्ठों का सम्मान है, उस पार्टी के एक अदना से मोर्चा के अध्यक्ष शीर्ष नेतृत्व को कुछ नहीं मानते। आलानेताओं को समझ लेने और अपनी बात को मनवाने की जिद करने का उनका एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बातचीत में वे उन लोगों की पैरवी करते सुनाई दे रहे हैं, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए खासी परेशानियां खड़ी की थी और राजधानी भोपाल की दो मुस्लिम बहुल विधानसभाओं में हार का मुंह देखने के हालात बनाने का कारण भी बने हैं।
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एम एजाज खान का ये ऑडियो सोशल मीडिया के लगभग सभी प्लेटफार्म पर लहरा रहा है। इसमें वे मसाजिद कमेटी के पूर्व प्रभारी सचिव यासिर अराफात से बात करते सुनाई दे रहे हैं। गौरतलब है कि अराफात ने मसाजिद कमेटी से जुड़े कुछ उलेमाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। ये नोटिस नायब मुफ्ती रईस अहमद, निकाहख्वाह काजी अजमत शाह मक्की और दानिश परवेज को जारी किया गया था।
इनके खिलाफ मिली उन शिकायतों के आधार पर यह नोटिस दिया गया था, जिनमें कहा गया था कि इन सभी लोगों ने भोपाल उत्तर, मध्य और नरेला विधानसभाओं में भाजपा के खिलाफ मतदान करने की अपील और व्यक्तिगत प्रचार किया था। शिकायतकर्ताओं ने इससे संबंधित दस्तावेज, फोटो, सीडी आदि भी प्रस्तुत किए थे।
एजाज बोले- मैं समझ लूंगा शीर्ष को, नोटिस वापस लो
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष वायरल ऑडियो में कहते सुनाई दे रहे हैं कि शीर्ष नेतृत्व को मैं समझ लूंगा, आप नोटिस पर कार्रवाई न करें। एजाज ये कहते भी सुनाई दिए कि हालात अच्छे नहीं हैं, इसलिए कोई ऐसी कार्रवाई न करें, जिससे मुफ्ती रईस का कोई नुकसान हो। उन्होंने मुफ्ती रईस अहमद के अच्छा और सच्चा होने की गारंटी भी ले ली।
एजाज का कांग्रेस से रहा है पुराना नाता, मसूद के उस्ताद भी
विदित हो कि वर्तमान में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने बैठे एम एजाज खान का कांग्रेस से लंबा नाता रहा है। ये बात भी सर्व विदित है कि एम एजाज खान और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के बीच कभी उस्ताद और शागिर्द का रिश्ता भी रहा है। इस बात के भी प्रमाण मौजूद हैं कि पुराने भोपाल स्थित बेनजीर ग्राउंड में मौजूद मंदिर को बारंबार धराशाई करने में अग्रणीय भूमिका निभाई है।
झूठी शिकायतों से सरकार को डाला मुश्किल में, अब अदालत के घेरे में
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष एम एजाज खान ने भाजपा के अन्य कद्दावर मुस्लिम नेताओं की मदद से आला नेताओं और अल्पसंखयक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर जी को फर्जी, झूठी और गैर तथ्यात्मक शिकायतों का अंबार लगा दिया, जिनका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है। इन शिकायतों का असर ये हुआ कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने यासिर अराफात को मसाजिद कमेटी के प्रभारी सचिव पद से मुक्त कर दिया है।
जबकि पूर्व में कांग्रेस शासनकाल में हुए एक घटनाक्रम के दौरान वर्ष 2020 में अदालत ने यासिर अराफात के पक्ष में यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए थे। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा जारी किए गए नए आदेश अदालत की अवमानना की श्रेणी में माने जा सकते हैं, जिससे प्रदेश सरकार को भी विकट स्थिति से गुजरना पड़ सकता है।
...और होगा चुनाव में नुकसान
भाजपा अल्पसंखयक मोर्चा द्वारा कांग्रेस समर्थित उलेमाओं और अन्य लोगों को दिया जाने वाला सहयोग और समर्थन आने वाले दिनों में होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है। कारण यह है कि विधानसभा चुनाव की तरह ये उलेमा इस चुनाव में भी कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए काम करेंगे। प्रदेश में मौजूद करीब 45 मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर होने वाला नुकसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मिशन 370 सीट को भी धक्का लगाएंगे, इसकी उम्मीद की जा सकती है।