मध्य प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी है। इस बार औसत बारिश से करीब 23 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है। इस सीजन में गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे तक मध्य प्रदेश में कुल 1143 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। अगले कुछ दिनों बारिश बनी रहेगी। अगले 24 घंटों में प्रदेश के 9 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है।
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के शहडोल, भोपाल, उज्जैन, चंबल एवं ग्वालियर संभागों के जिलों में अनेक स्थानों पर, रीवा, सागर, जबलपुर संभागों के जिलों में अनेक स्थानों पर तथा इंदौर एवं नर्मदापुरम संभागों में कुछ स्थानों पर वर्षा दर्ज की गई। गुना में 12, बामौरी में 10, लटेरी, सिंरोज, बालाघाट में 9, शिवपुरी में 8, श्योपुरकलां, बड़ौदा, मेहगांव, घुघरी में 7, पाली, मुंगावली में 6, जीरापुर, वीरपुर, करहल, आरोन, बदरवास, अलीपुर, बिरसा, लांजी, लालबर्रा, बुढार, बेनीबारी में 5 सेमी तक पानी गिरा है।
अगले 24 घंटों के लिए मौसम विभाग का पूर्वानुमान बता रहा है कि रीवा, सागर, नर्मदापुरम, भोपाल, ग्वालियर एवं चंबल संभागों के जिलों में अनेक स्थानों पर, इंदौर, उज्जैन, शहडोल एवं जबलपुर संभागों के जिलों में कुछ स्थानों पर वर्षा या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
मौसम विभाग ने यलो अलर्ट भी जारी किया है। जिसके मुताबिक आगर, शाजापुर, श्योपुरकलां, गुना, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर, धार, खरगोन जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका है। यहां से ढाई से चार इंच तक बारिश हो सकती है। इसके अलावा रीवा, सागर, नर्मदापुरम, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर एवं चंबल संभागों के जिलों में तथा जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला जिलों में कहीं-कहीं बिजली गिरने की आशंका है।
मौसम विभाग के आंकड़ों की बात करें तो तापमान में भी गिरावट जारी है। उज्जैन-रतलाम में 6 डिग्री तक पारा लुढ़का है। प्रदेश में सबसे गर्म सीधी रहा, यहां 33.2 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। गुना जिले में 118 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रदेश के मौसम पर तीन वेदर सिस्टम असर डाल रहे हैं। इन सिस्टमों के कारण प्रदेश में बारिश का सिलसिला फिलहाल बना रहेगा।
जानकार बताते हैं कि एक पश्चिमी विक्षोभ ट्रफ के रूप में पाकिस्तान के आसपास एक्टिव है। उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश पर बना कम दबाव का क्षेत्र कमजोर पड़कर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात के रूप में बदल गया है। एक ट्रफ लाइन पश्चिमी-पूर्वी राजस्थान से उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा से होकर बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है।