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मध्यप्रदेश: प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने ममता को भेजी रामायण, कहा- श्रीराम बोलना सीखें

Sun, 24 Jan 2021 05:25 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
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रामेश्वर शर्मा (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
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मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर और हुजूर क्षेत्र के विधायक रामेश्वर शर्मा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को रामायण की एक प्रति भेजी है। इस बात की जानकारी खुद उन्होंने ट्वीटर पर दी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अयोध्या में सालों बाद भगवान श्रीराम का मंदिर बनने वाला है और इससे ममता नाराज हैं।

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शर्मा ने कहा कि ममता को राम नाम के उद्घोष से नफरत हैं। उन्होंने कहा कि ममता दीदी मेरी आपसे प्रार्थना है कि जय श्रीराम बोलना सीखो। भगवान राम का विरोध करना बंद करो। बंगाल में एक कार्यक्रम के दौरान आपने भगवान राम का अपमान किया है। बंगाल की जनता विधानसभा चुनाव में आपको सबक सिखाएगी। 
 

भाजपा नेता ने कहा, 'ममता दीदी भगवान राम का नाम जपो। मैं आपको रामायण की एक पुस्तक भेज रहा हूं। रामायण को पढ़िए। उम्मीद करता हूं कि आपको सद्बुद्धि आएगी। जैसे पूरी दुनिया में प्रभु श्रीराम के भक्त हैं, आप भी रामायण पढ़कर उनकी भक्त हो जाएंगी और जय श्रीराम का नाम जपने लगेंगी।'
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विधानसभा के सामयिक अध्यक्ष ने कहा कि सालों के इंतजार के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनने वाला है। इसके लिए देशभर में समर्पण निधि अभियान चल रहा है जो 15 फरवरी तक चलेगा। इसमें हर वर्ग के लोग अपनी श्रद्धा अनुसार दान दे रहे हैं। ममता दीदी, आप भगवान श्रीराम के नारों से गुस्सा मत होइये।

विहिप ने भी की ममता बनर्जी की आलोचना
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के यहां मुख्य 'पराक्रम दिवस' समारोह में 'जय श्री राम' के उद्घोष के बाद भाषण नहीं देने के लिए रविवार को तीखी आलोचना की। विहिप ने कहा कि यह उनकी 'हिंदू विरोधी' मानसिकता और किसी विशेष समुदाय को खुश करने के प्रयास को दर्शाता है। बनर्जी शनिवार को विक्टोरिया मेमोरियल में नेताजी के जयंती समारोह में संबोधन देने के लिए आमंत्रित किये जाने पर अपने कथित 'अपमान' पर नाराज नजर आ रही थीं। 





विहिप के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा, 'ममता बनर्जी ने कल जो किया वह उनकी हिंदू-विरोधी मानसिकता और तुष्टिकरण की राजनीति के प्रति उनके प्रयासों को दर्शाता है। भगवान राम देश की आत्मा हैं। 'जय श्री राम' के उद्घोष से उन्हें गुस्सा क्यों आता है? हम समझने में असफल हैं।' उधर भाजपा नेता और नेताजी बोस के रिश्तेदार चंद्र कुमार बोस ने कहा कि नारे में कुछ भी गलत नहीं था और नेताजी की जयंती को राजनीति के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

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