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हाईकोर्ट से राहत: स्कूल प्रबंधन को निर्देश-सात दिन में दें दस्तावेज, अंकसूची-टीसी के लिए भटक रहा था छात्र

Thu, 05 Nov 2026 10:08 AM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के 14 वर्षीय छात्र को राहत देते हुए स्टेमफील्ड इंटरनेशनल स्कूल प्रबंधन को सात दिन में सातवीं और आठवीं की अंकसूची तथा टीसी देने का निर्देश दिया है। दस्तावेज नहीं देने की स्थिति में स्कूल को कारण बताने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।
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मप्र हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कक्षा सातवीं और आठवीं की अंकसूची तथा स्थानांतरण प्रमाणपत्र पाने के लिए भटक रहे 14 वर्षीय छात्र को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायालय ने बलदेवबाग क्षेत्र में स्थित स्टेमफील्ड इंटरनेशनल स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वह याचिकाकर्ता छात्र को सात दिन की तय अवधि के भीतर संबंधित सभी शैक्षणिक दस्तावेज अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए।
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उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने यह भी आदेश दिया है कि यदि स्कूल प्रबंधन निर्धारित समय में दस्तावेज प्रदान करने में असमर्थ रहता है, तो उसे इसी समय-सीमा के अंदर इसके पीछे के ठोस कारणों की विस्तृत जानकारी भी छात्र को देनी होगी।

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न्यायालय का निर्देश और याचिका पर सुनवाई
यह महत्वपूर्ण निर्देश न्यायालय के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ द्वारा आनंद कॉलोनी, बलदेवबाग निवासी छात्र शिवराज त्रिपाठी की ओर से प्रस्तुत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए गए। याचिका में छात्र ने स्कूल प्रबंधन के उदासीन रवैये को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने छात्र के शैक्षणिक हित को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने का आदेश दिया। इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और विस्तृत सुनवाई के लिए अदालत ने 19 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।

वकीलों के तर्क और स्कूल की संबद्धता पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता छात्र का पक्ष अधिवक्ता राजेश चंद और अधिवक्ता रोहित नानेपाग ने प्रभावी ढंग से रखा। वकीलों ने अदालत के समक्ष दलील दी कि छात्र ने कक्षा सातवीं तथा आठवीं उत्तीर्ण करने के बाद स्कूल प्रशासन से अपनी दोनों वर्षों की अंकसूचियों और स्थानांतरण प्रमाणपत्र की मांग की थी। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने उसे आवश्यक दस्तावेज प्रदान नहीं किए।
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दस्तावेज न मिलने के कारण छात्र को विवश होकर न्याय के लिए न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। इसके अतिरिक्त याचिका में स्कूल की मान्यता और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से उसकी संबद्धता से जुड़े दस्तावेज पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रारंभिक पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ ने समयबद्ध निर्देश जारी कर दिए।
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