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Hajj News: ख्वाहिशमंदों का अरमान पूरा, वेटिंग लिस्ट के 230 आवेदकों को मिला मौका, जानिए हज कमेटी का नया आदेश

Sat, 11 Jan 2025 03:08 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

देश भर के विभिन्न प्रदेशों को मिली अतिरिक्त सीटों में मध्यप्रदेश के हिस्से भी 230 सीटें आई हैं। इन अतिरिक्त सीटों के साथ अब प्रदेश का हज कोटा आठ हजार से भी अधिक हो गया है।
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हज हाउस, भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इस्लामी मान्यता के पांच अहम उसूलों में शामिल एक हजयात्रा हर मुस्लिम की ख्वाहिश और अरमान होता है। इसी नजरिए के साथ हर साल लाखों लोग हज आवेदन करते हैं। लेकिन सरहदों की बंदिशों और नियमों की पाबंदी के चलते हर आवेदक को हज सफर नसीब नहीं हो पाता है। इस साल भी हज आवेदकों में से बड़ी तादाद में हज यात्रा का अरमान पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इस बीच अन्य प्रदेशों से बचे कोटे की सीटों पर प्रतीक्षा सूची के आवेदकों को एडजस्ट करने का क्रम आवेदकों को अल्लाह की तरफ से मिले स्पेशल करम के रूप में माना जा रहा है। देशभर के विभिन्न प्रदेशों को मिली अतिरिक्त सीटों में मप्र के हिस्से भी 230 सीटें आई हैं। इन अतिरिक्त सीटों के साथ अब प्रदेश का हज कोटा 8 हजार से भी अधिक हो गया है। 

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जानकारी के मुताबिक ऑल इंडिया हज कमेटी ने विभिन्न प्रदेशों को अतिरिक्त सीटों का आवंटन किया है। यह सीटें प्रदेश को मिले मुख्य कोटे और पूर्व में जारी किए गए अतिरिक्त कोटे से अलग होंगी। इस क्रम में मप्र की करीब 2700 आवेदकों की प्रतिक्षा सूची को क्लियर किया गया है। इसके मुताबिक वेटिंग लिस्ट के अनुक्रमांक 906 से 1136 तक पर अंकित आवेदकों को हज सफर पर जाने की अनुमति दे दी गई है। इन चुने गए आवेदकों को हज खर्च की पहली और दूसरी किस्तों की राशि एक साथ जमा करना होगी। हज कमेटी ने ऐसे सभी आवेदकों को खर्च की यह राशि 2 लाख, 72 हजार, 300 रुपए 22 जनवरी तक जमा करने के लिए कहा है। गौरतलब है कि प्रदेश का शुरुआती हज कोटा 7107 था। इसके बाद इसमें करीब 900 सीटों का इजाफा हुआ था। अब नए अतिरिक्त कोटे के साथ प्रदेश का हज कोटा 8 हजार से भी ज्यादा हो गया है।

किसे मिला कितना अतिरिक्त कोटा

  • मध्यप्रदेश  230
  • छत्तीसगढ़  24
  • दिल्ली       164
  • गुजरात      483
  • कर्नाटक     235
  • केरल         496
  • महाराष्ट्र      1092
  • तमिलनाडु   303
  • तेलंगाना      656

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कैसे मिलता है अतिरिक्त कोटा
देशभर के विभिन्न राज्यों में मौजूद मुस्लिम आबादी के लिहाज से इनका हज कोटा तय किया जाता है। यहां होने वाले आवेदन के बाद बची हुई सीटें सेंट्रल हज कमेटी के पास सरेंडर कर दी जाती हैं। यहां से इन बची सीटों का आवंटन उन प्रदेशों में वेटिंग लिस्ट की स्थिति मौजूद है। 

कैंसिलेशन भी एक वजह
नई हज नीति के अनुसार हज 2025 के आवेदन समय पूर्व ही करा लिए गए हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होते ही हज कमेटी ने हज सफर से करीब 7 महीने पहले ही खर्च की राशि का तगादा कर दिया। तीन माह की अवधि में सतत दो किश्तों की बड़ी राशि आवेदकों के लिए अप्रत्याशित जैसी है। नतीजा यह है कि बड़ी संख्या में ऐसे आवेदक हैं, जो चयन होने के बाद भी समय पर राशि जमा नहीं कर पाए हैं। जिसके चलते इनके आवेदन निरस्त होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

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