मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पर भोपाल में दो शराब दुकानों के ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। करीब 930 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया के नाम से सामने आए एक कथित बयान में ये दावे किए गए हैं। इसमें फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) के आधार पर शराब दुकानों के ठेके हासिल करने और बिना लाइसेंस शराब बिक्री में मदद करने के आरोप भी शामिल हैं। कथित बयान की एक कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
ये भी पढ़ें- भोपाल में आर्मी डे परेड की तैयारी: 50 हजार दर्शकों और 60 टन के टैंक के लिए मजबूत होगी 3.5 किमी लंबी सड़क
तनुज सेठी के जरिए मुलाकात का दावा
कथित बयान के अनुसार, गोगिया वर्ष 2022-23 में भोपाल आया था। उसने दावा किया है कि तनुज सेठी ने उसकी मुलाकात दीपम रायचूरा से कराई थी। उसे बताया गया था कि रायचूरा आबकारी विभाग में सहायक आयुक्त हैं। इसके बाद रायचूरा ने गोगिया को दीपक दुबे से मिलवाया और कथित तौर पर कहा कि वह उनका काम देखता है। बयान में दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र में शराब की दो दुकानों के ठेके जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई। इन दुकानों के लिए बैंक गारंटी के रूप में इस्तेमाल की गई फर्जी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में भी ओएसडी की भूमिका होने का आरोप लगाया गया है।
ये भी पढ़ें- मप्र: पतंजलि गाय का घी जांच में असुरक्षित, बाजार से वापसी के आदेश; दुकानों पर मिला तो होगी जब्ती
दो किस्तों में एक करोड़ रुपये देने का आरोप
गोगिया के कथित बयान में दावा किया गया है कि दुकानों के ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये दिए गए। इसमें से 50 लाख रुपये नकद दिए जाने की बात कही गई है। बयान के अनुसार, यह रकम दीपक दुबे ने होशंगाबाद रोड स्थित शालीमार फोर्ट लेजा के एक फ्लैट से ली थी। बाकी 50 लाख रुपये आईएसबीटी क्षेत्र में होटल चलाने वाले एक व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर कराने का आरोप लगाया गया है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में इस लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि करने वाले दस्तावेज सामने नहीं आए हैं।
ये भी पढ़ें- राजस्व कार्यों में भ्रष्टाचार पर एक्शन: स्वामित्व योजना में काम नहीं होने पर जााएगी कलेक्टरी, सीएस का अल्टीमेटम
बिना लाइसेंस शराब बिक्री में मदद का भी आरोप
कथित बयान में यह भी दावा किया गया है कि दीपम रायचूरा ने शराब दुकानों के जरिए बिना लाइसेंस शराब उपलब्ध कराने में मदद की। बयान में एक मोबाइल नंबर का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस नंबर पर दोनों के बीच कॉल और चैट होती थी।
इस मामले में दीपम रायचूरा से उनका पक्ष लेने संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।