मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को अटल बिहारी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग और प्राधिकरणों के नवनियुक्त पदाधिकारियों को सुशासन और प्रशासन के अहम मंत्र दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा में सौम्यता और निर्णय में दृढ़ता होना बेहद जरूरी है। आपकी नियुक्ति केवल पद नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की सेवा का सुनहरा अवसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति और प्रशासन का एकमात्र उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए। स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में नैतिकता और शुचिता बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी पूरी निष्ठा, प्रशासनिक दक्षता और सेवा भावना के साथ अपने दायित्व निभाएं, क्योंकि जनता के बीच सरकार की साख उनके काम से ही बनेगी।
सहयोगियों का चयन सोच-समझकर करें
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नवनियुक्त पदाधिकारियों से कहा कि वे पूरी गरिमा, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने सलाह दी कि सहयोगियों का चयन सोच-समझकर करें और अपने कार्य व्यवहार में सादगी व संतुलन बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनावश्यक प्रचार-प्रसार और गैरजरूरी गतिविधियों से दूरी बनाए रखना भी प्रशासनिक शुचिता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डॉ. यादव ने स्पष्ट कहा कि सरकार की कदाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति है। इसलिए किसी भी संस्थान में भ्रष्टाचार, अनियमितता या अनुचित आचरण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पदाधिकारियों को ऐसे लोगों और गतिविधियों से दूर रहने की भी सलाह दी, जिनसे उनकी व्यक्तिगत और संस्थागत गरिमा प्रभावित हो सकती है।
ये भी पढ़ें-
Twisha Sharma Death: कौन थीं ट्विशा शर्मा? मिस पुणे रहीं, फिल्मों में किया काम, शादी के पांच महीने बाद मौत
आय के स्त्रोत विकसित करना आज की जरूरत
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और अटल बिहारी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने पदाधिकारियों को विभागीय नीतियों और नियमों का गहराई से अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, टीम भावना और आपसी समन्वय से ही संस्थानों को प्रभावी बनाया जा सकता है। डॉ. यादव ने वित्तीय अनुशासन पर जोर देते हुए कहा कि फिजूलखर्ची पर नियंत्रण और आय के नए स्रोत विकसित करना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आत्मानुशासन से ही आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
ये भी पढ़ें-
Twisha Sharma Death Case: 'मेरी बेटी को इंसाफ चाहिए' ट्विशा के माता-पिता का फूटा दर्द, बोले- उसे मार दिया गया
सरकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाए
मुख्यमंत्री ने डिजिटल गवर्नेंस को सुशासन का मजबूत आधार बताते हुए कहा कि सभी संस्थानों में तकनीक आधारित निगरानी, डाटा आधारित निर्णय और पारदर्शी सेवा वितरण व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने पदाधिकारियों से सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने की अपील भी की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की कदाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति है। इसलिए पदाधिकारी सोच-समझकर अपने सहयोगियों का चयन करें और ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखें, जिनसे उनकी गरिमा प्रभावित हो सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुलभता और संवेदनशीलता हर पदाधिकारी के कार्यकाल का केंद्र होना चाहिए। आम नागरिक को यह महसूस होना चाहिए कि उसकी समस्याएं सुनने और समाधान देने वाला कोई अपना वहां मौजूद है।
ये भी पढ़ें-
MP Weather Today: मध्य प्रदेश में आग उगल रही गर्मी, पारा 45 डिग्री पहुंचा, रात में भी नहीं मिल रही राहत
नवाचारों से प्रदेश को बेहतर राज्य बनाने की अपील
उन्होंने नशामुक्ति, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, बाल संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाने का भी आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश को विकसित बनाने का सुनहरा अवसर मिला है। सभी पदाधिकारी अपने कार्यों और नवाचारों से मध्यप्रदेश को देश का सबसे बेहतर राज्य बनाने में योगदान दें।