17 सितंबर 2022 को भारत की धरती पर सात दशक बाद चीतों का आगमन हुआ था। भारत में विलुप्त होने के बाद चीता प्रोजेक्ट के तहत फिर से चीतों को बसाने की कवायद शुरू हुई। इस प्रोजेक्ट को दो साल पूरे हो रहे है। इस बीच मध्य प्रदेश के महालेखाकार की एक रिपोर्ट में कुनो राष्ट्रीय उद्यान में प्रोजेक्ट चीता के प्रबंधन पर चिंता व्यक्त की गई है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के विभागों के बीच "समन्वय की कमी" को उजागर किया गया है।
रिपोर्ट से यह भी पता चला कि अफ्रीका से चीतों के आगमन के बावजूद 2020-2030 के लिए पार्क की प्रबंधन योजना में चीता के रिलोकेट का कोई उल्लेख नहीं है। इसको लेकर पूछे जाने पर मुख्य वन संरक्षक और लायन प्रोजेक्ट के निदेशक उत्तम शर्मा ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट पर जवाब दे दिया जाता है।
प्रबंधन योजना में चीतों का कोई जिक्र नहीं
महालेखाकार की अगस्त 2019 से नवंबर 2023 तक की अवधि को कवर करने वाले ऑडिट में पाया गया कि ग्राउंड स्टाफ और कुनो वन्यजीव प्रभाग "साइट चयन" या चीता रिलोकेट प्रोजेक्ट में शामिल नहीं थे। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त रिपोर्ट में कहा गया है कि कूनो अभयारण्य को मूल रूप से एशियाई शेरों के दूसरे निवास स्थान के रूप में चिन्हित किया गया था। हालांकि नवंबर 2023 तक एशियाई शेरों के पुनरुद्धार के लिए कोई प्रयास नहीं हुए। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है इस प्रबंधन योजना में चीतों का कोई जिक्र नहीं था। इसलिए 2021-22 से 2023-24 (जनवरी 2024 तक) प्रोजेक्ट चीता पर किया गया 44.14 करोड़ रुपये का खर्च अनुमोदित प्रबंधन योजना अनुरूप नहीं था।
किसके निर्देश पर चीता के रिलोकेट का काम शुरू हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार ऑडिटरों को यह स्पष्ट करने वाला कोई रिकॉर्ड नहीं मिला कि किसके निर्देश के तहत चीता के रिलोकेट करने का काम शुरू हुआ। 28 जनवरी, 2020 के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अफ्रीकी चीतों के लिए सबसे उपयुक्त स्थान का चयन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस पैनल को हर चार महीने में अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपनी थी। सुप्रीम कोर्ट ने केवल विशेषज्ञ समिति की स्थापना की थी। यह स्पष्ट नहीं था कि चीता का रिलोकेट केवल कूनो राष्ट्रीय उद्यान के भीतर ही किया जाएगा या नहीं।
55 स्वीकृत पदों में से 43 खाली
वन विभाग के अधिकारियों ने लेखा परीक्षकों को बताया, "इसलिए, प्रबंधन योजना में चीता रिलोकेट पर कोई अध्याय नहीं है। चीता रिलोकेट से संबंधित कार्य केंद्र सरकार द्वारा तैयार चीता एक्शन प्लान 2021 के अनुसार किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि 15 अप्रैल, 2013 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार कूनो को एशियाई शेरों के लिए वैकल्पिक आवास के रूप में विकसित किया जाना था और राज्य सरकार इसके बारे में "पूरी तरह से गंभीर" थी।
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि वन विभाग के अधिकारियों के बयानों से स्पष्ट है कि भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के विभागों के बीच समन्वय की कमी थी। यह भी स्पष्ट है कि ग्राउंड स्टाफ और वन प्रभाग साइट चयन या चीता पुनरुत्पादन अध्ययन में शामिल नहीं थे। मामला सरकार के ध्यान में लाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 255 स्वीकृत पदों में से 43 खाली थे, जिसका वनों और जंगली जानवरों की सुरक्षा पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है।
प्रशिक्षण लेकर आए अधिकारी को हटा दिया
रिपोर्ट में कहा गया है कि कूनो वन्यजीव प्रभाग के पूर्व प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) प्रकाश कुमार वर्मा को चीता प्रबंधन में प्रशिक्षण के लिए दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया भेजा गया था। हालांकि, प्रशिक्षण के कुछ ही दिनों बाद उन्हें कहीं और स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे उनका "प्रशिक्षण चीता के पुनरुद्धार के लिए अनुपयोगी हो गया और उस पर होने वाला खर्च भी व्यर्थ हो गया। भारत में चीता की शुरूआत के लिए कार्य योजना के अनुसार प्रशिक्षित कर्मचारियों को न्यूनतम पांच वर्ष की अवधि के लिए चीता संरक्षण स्थलों से नहीं हटाया जाना था।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे
भोपाल स्थित वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण सवाल उठाती है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के विभागों के बीच समन्वय और समझ के बारे में चिंताएं शामिल हैं, जो चीता प्रजनन कार्यक्रम की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि, दुनिया के पहले ऐसे प्रयास के हिस्से के रूप में कुनो में अफ्रीकी चीतों के आगमन के बावजूद, कई प्रमुख पद खाली हैं, जिसका सीधा असर जानवरों के प्रबंधन पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चीता प्रोजेक्ट की गड़बड़ियों को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
शावकों समेत चीतों की संख्या 24
बड़ी बिल्लियों के पहले अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण के हिस्से के रूप में अब तक 20 चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में लाया गया है - सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते। भारत में उनके आगमन के बाद से आठ वयस्क चीते - तीन मादा और पांच नर - मर चुके हैं। भारत में 17 शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 12 जीवित बचे हैं, जिससे कुनो में शावकों सहित चीतों की कुल संख्या 24 हो गई है। वर्तमान में, सभी बाड़ों में हैं। इस भव्य पहल के 17 सितंबर को दो साल पूरे हो गए।