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MP Budget 2026: बजट पर अलग अलग मत, किसान बोले अधूरी मांगें, कर्मचारी नाराज, व्यापारी-महिलाओं ने जताई उम्मीद

Wed, 18 Feb 2026 08:32 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर प्रदेश में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। किसान संघ और कर्मचारी संगठनों ने लंबित मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई, जबकि कुछ किसानों, व्यापारियों और लाडली बहनों ने बजट को सकारात्मक और विकासोन्मुख बताया। एमएसएमई और भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन के प्रावधानों को उद्योग जगत ने उत्साहजनक कदम माना।
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बजट - फोटो : Bhopal
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विस्तार
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जगदीश देवड़ा, उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री, ने बुधवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। यह मोहन यादव सरकार का तीसरा और देवड़ा का सातवां बजट है। बजट के बाद किसान, कर्मचारी, व्यापारी और लाडली बहनों ने अपने-अपने अनुभव और अपेक्षाएं सामने रखीं। बजट 2026-27 पर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं किसान संघ और कर्मचारी संगठन ने लंबित मांगों पर निराशा जताई, जबकि किसानों का एक वर्ग, व्यापारी समुदाय और लाडली बहनें इसे उम्मीद और अवसरों से भरा बजट मान रहे हैं।
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किसान संघ: अच्छी पहल, पर लंबित मांगें बाकी
भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री चंद्रकांत कुमार गौर ने कहा कि सरकार ने कुछ अच्छी पहल की है, लेकिन किसानों की कई लंबी मांगें अब भी अधूरी हैं। उन्होंने किसान सम्मान निधि बढ़ाने की मांग दोहराते हुए कहा कि बजट में इस पर कोई घोषणा नहीं हुई। कृषि उपकरणों पर जीएसटी समाप्त करने की मांग केंद्र और राज्य दोनों से की गई थी, पर इस पर भी प्रावधान नहीं हुआ। सोलर पंप योजना पर गौर ने कहा कि सरकार इसकी ढोल पीटती है, लेकिन जमीनी हकीकत अच्छी नहीं है। हजारों आवेदन लंबित हैं। अधिकारियों से कई बार चर्चा के बावजूद समाधान नहीं हुआ।
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किसान का समर्थन: कृषि पर बड़ा फोकस
किसान अखिलेश कुमार पांडे ने बजट को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि कृषि पर सरकार का फोकस दिख रहा है और किसानों के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। मैं किसान का बेटा हूं, खेती करता हूं। किसानों, युवाओं, महिलाओं और मजदूरों सभी के लिए सकारात्मक सोच दिखती है, उन्होंने कहा। पांडे ने लाडली लक्ष्मी-लाडली बहन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े प्रावधानों को भी सराहा।


कर्मचारी संगठन ‘कर्मचारी विरोधी’ बजट
मध्य प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार पांडे ने बजट को कर्मचारी विरोधी बताया। उनका कहना है कि सरकार कर्ज में डूबी है, इसलिए कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं मिला। लंबित डीए देने, स्थायी कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ, दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण और मजदूरों के वेतन वृद्धि इन सभी अपेक्षाओं पर बजट में कोई ठोस घोषणा नहीं हुई। कुल मिलाकर कर्मचारियों-मजदूरों के लिए कुछ खास नहीं है।
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छोटे व्यापारी: नया टैक्स नहीं, पर रोजगार पर जोर
न्यू मार्केट व्यापार संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा कि लगभग 4.65 लाख करोड़ रुपए के इस बड़े बजट में छोटे व्यापारियों पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया, इसके लिए वित्त मंत्री का धन्यवाद। उन्होंने लाडली बहनों के लिए बढ़े प्रावधान का स्वागत किया, लेकिन सुझाव दिया कि बेहद चकाचौंध वाले खर्चों की बजाय रोजगार और उद्योगों में निवेश बढ़े, ताकि सरकार के पास संसाधन संतुलित रहें।

लाडली बहन की उम्मीद
लाडली बहन गीता अहिरवार ने कहा कि योजना से घर चलता है। उनके पति विकलांग हैं और परिवार का खर्च इसी सहायता से चलता है। राशि और बढ़े तो हमारे लिए बड़ी खुशी होगी। योजना शुरू होने से ही लाभ ले रहे हैं, सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि आगे हमें इस योजना में और ज्यादा राशि बढ़ाने की उम्मीद है सरकार आने वाले समय में और राशि बढ़ाएगी।


चेंबर ऑफ कॉमर्स: एमएसएमई व मेट्रोपॉलिटन रीजन से उत्साह
भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव अजय देवनानी ने बजट का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लघु उद्योगों/एमएसएमई के लिए 6000 करोड़ रुपए की घोषणा उत्साहवर्धक है। साथ ही, भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए बड़े प्रावधान को राजधानी के लिए बड़ा उपहार बताया। उनके मुताबिक सरकार व्यापार बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और यह बजट कारोबारी माहौल के लिए बेहतर साबित होगा।

 
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