माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं परीक्षा में इस बार मेरिट सूची में 221 छात्रों ने जगह बनाई, जिसमें ग्वालियर, भोपाल और इंदौर के बहुत कम छात्र जगह बना सके। टॉप-10 जिलों में 6 जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों का दबदबा रहा, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के बेहतर प्रदर्शन की तस्वीर सामने आई। वहीं, बड़े शहर टॉप-30 से बाहर रहे।
माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं परीक्षा की स्टेट मेरिट सूची में इस बार 221 विद्यार्थियों ने जगह बनाई है। इनमें ग्वालियर के सर्वाधिक 10, भोपाल के 9, इंदौर और जबलपुर के 5-5 विद्यार्थी शामिल हैं। चारों बड़े शहरों के कुल 29 छात्र ही मेरिट में जगह बना सके हैं। मैथ्स-साइंस संकाय में भोपाल और ग्वालियर के 6-6, इंदौर के 3 और जबलपुर के 2 विद्यार्थी ही मेरिट सूची में शामिल हैं, जो महानगरों के कमजोर प्रदर्शन को बताता है।
बड़े शहर टॉप-30 से बाहर
छात्रों के पास प्रतिशत के मामले में प्रदेश के चारों बड़े शहर टॉप-30 में भी जगह नहीं बना सके। जबलपुर 77.26% के साथ 33वें, इंदौर 69.94% के साथ 43वें, भोपाल 68.61% के साथ 45वें और ग्वालियर 61.67% के साथ 49वें स्थान पर रहे। प्रदेश में सरकारी स्कूलों का परिणाम 80.43% रहा, जो पिछले वर्ष के 75.79% से 4.64% अधिक है। वहीं, निजी स्कूलों का परिणाम 69.67% रहा, जो पिछले साल के 72.47% से 2.80% कम है।
जनजातीय जिलों का दबदबा
इस बार के परिणाम की खास बात यह रही कि टॉप-10 जिलों में 6 जिले जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र से हैं। इनमें झाबुआ, अनूपपुर, अलीराजपुर, मंडला, डिंडौरी और बालाघाट शामिल हैं।