सीएम मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल
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चुनाव आयोग के एसआईआर को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। रविवार को भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए। दोनों नेताओं ने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस लगातार संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने का काम करती रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि "नाच न जाने, आंगन टेढ़ा" वाली स्थिति है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता का इस तरह का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र को मजबूत रखने की जिम्मेदारी जितनी सत्ता पक्ष की है, उतनी ही विपक्ष की भी है। मोहन यादव ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्तों को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस के पास कोई ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें जनता के सामने रखना चाहिए।
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'राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए'
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर भ्रम फैलाना गंभीर विषय है। उन्होंने राहुल गांधी से अपने आरोपों के लिए देश से माफी मांगने और नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने बोफोर्स और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मामलों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी पहले भी कई मामलों में सवाल उठाते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
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हेमंत खंडेलवाल ने भी कांग्रेस पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण सामने रखने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर जनता को भ्रमित करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस के आरोपों पर सवाल खड़े हुए हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
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ईसीआई ने एसआईआर पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को स्पष्ट किया था कि देशभर में एसआईआर से जुड़े फैसले आयोग के तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर का 24 जून 2025 का आदेश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था। आयोग ने एसआईआर के दौरान नोटिस पाने वाले ऐसे मतदाताओं के लिए प्रक्रिया भी आसान की है, जिनके मामलों में रिकॉर्ड मैपिंग या अन्य तार्किक विसंगतियां हैं। ऐसे मामलों में बीएलओ घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे। सामान्य स्थिति में संबंधित व्यक्ति को ईआरओ कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने इसी स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस को अब अपने आरोपों के संबंध में जवाब देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "राजकुमार हैं कि मानते नहीं।"