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एमपी: 7 दिसंबर से शुरू होगा विधानसभा का शीतकालीन सत्र, पांच दिन चलेगी कार्यवाही; हंगामेदार रहने के आसार

Fri, 06 Nov 2026 05:28 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक चलेगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने के आदेश के बाद सत्र बुलाने की अधिसूचना जारी हो गई हैं। इस बार जहरीली शराब से मौतों, पुलिस निरीक्षक की मौत, खाद संकट और बिजली कटौती जैसे मुद्दों पर कांग्रेस सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं, सरकार अनुपूरक बजट सहित कई विधायी कार्य सदन में पेश करेगी।
 
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एमपी विधानसभा सत्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र की अधिसूचना जारी कर दी गई है। सोलहवीं विधानसभा का 12वां सत्र 7 दिसंबर से 11 दिसंबर 2026 तक चलेगा। राज्यपाल के आदेश के अनुपालन में विधानसभा सचिवालय ने शुक्रवार को सत्र आहूत करने संबंधी अधिसूचना जारी की है। पांच दिन के इस सत्र में महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों के साथ अशासकीय कार्य भी संपादित किए जाएंगे। विधानसभा सचिवालय ने विधायकों से अशासकीय विधेयकों और संकल्पों से संबंधित सूचनाएं निर्धारित समय-सीमा में भेजने को कहा है। अशासकीय विधेयकों की सूचनाएं 11 नवंबर तक और अशासकीय संकल्पों की सूचनाएं 26 नवंबर तक सचिवालय में जमा की जा सकेंगी।
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इसके अलावा सत्र के दौरान स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और नियम 267-क के तहत सूचनाएं 1 दिसंबर से स्वीकार की जाएंगी। विधायक ये सूचनाएं विधानसभा सचिवालय में कार्यालयीन समय के दौरान सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक जमा कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि यह सोलहवीं मध्यप्रदेश विधानसभा का 12वां सत्र होगा। पांच दिवसीय सत्र में सरकार की ओर से अनुपूरक बजट सहित अन्य शासकीय कामकाज किए जाने की संभावना है। वहीं, विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

सत्र के हंगामेदार रहने के आसार 
इस बार शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्षी कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दों पर तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में जहरीली शराब से हुई मौतों और अवैध शराब के कारोबार के कारण पुलिस निरीक्षक की मौत का मामला सदन में उठ सकता है। इसके अलावा खाद की किल्लत और किसानों को हो रही परेशानी भी विपक्ष के निशाने पर रहेगी। प्रदेश में बिना सूचना बिजली कटौती का मुद्दा भी कांग्रेस उठा सकती है। वहीं, सरकारी नौकरियों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिलने का मामला भी सदन में गूंजने की संभावना है। अलग-अलग विभागों के चयनित उम्मीदवार लंबे समय से नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। विपक्ष इन आंदोलनों के जरिए सरकार से जवाब मांग सकता है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से सत्र के दौरान अनुपूरक बजट पेश किए जाने की तैयारी है। इसके अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े विधेयक और अन्य विधायी कार्य भी सदन में रखे जाएंगे। पांच दिन के इस सत्र में प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और अन्य संसदीय कार्यों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर बहस होने की संभावना है।
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उमंग सिंघार बोले- जनता के सवालों से भाग रही भाजपा सरकार, सत्र फिर सिर्फ पांच दिन का
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र की अवधि पांच दिन रखे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बालाघाट में बच्चों की मौत, सागर और देवास में जहरीली शराब से मौतें, किसानों की बदहाली, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ता कर्ज और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन सरकार ने चर्चा के लिए सिर्फ पांच दिन का समय रखा है। उन्होंने कहा कि इससे पहले मानसून सत्र भी पांच दिन का बुलाया गया था, जिसे तीन दिन में ही समाप्त कर दिया गया। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों के विधायक सात करोड़ से अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में सदन की अवधि बढ़नी चाहिए, घटनी नहीं। सिंघार ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल सदन में जनता से जुड़े सभी मुद्दे मजबूती से उठाएगा और सरकार से जवाब मांगेगा।

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