को खां, अपना एमपी गजब हे ओर इसके नेता भी। जब बन रिया था, तब डेम था और फूट गया तो तालाब हो गया। इसे केते हें हाथ की सफाई ओर जुबान की कलटी। जब धार जिले में बना कारम डेम भारी बारिश में फूट रिया था तो तमाम बचाव कार्य डेम के बतोर हो रिए थे, जब डेम का पानी निकल गया तो पिरदेश के गिरह मंतरी ने बता दिया के मियां, काय को परेशान हो रिए हो, वो तो महज तालाब था।
मामला मियां, दो हफ्ते पेले का हे, जब पूरे मधपिरदेश में भारी बारिश ने बवाल मचा रखा था। पूरे पिरदेश के डेम पानी से लबालब हो रिए थे। एमपी में 251 बड़े छोटे डेम हेंगे ओर तालाबों का तो कोई हिसाब नई हें। ओर तो ओर मूसलाधार बारिश में पक्की सड़कें तक तालाब बन गई थीं। इसी बीच बुरी खबर आई के धार जिले में बन रिया कारम डेम फूटने की कगार पे हे। फिर क्या था, धार से भोपाल तक बवाल मच गिया। ये डेम धार जिले के कोठीदा गांव के करीब कारम नदी पे बन रिया हेगा। खबर सुन के सभी के दिमाग में सवाल कूद रिया था के जब डेम पूरा बनाई नई हेगा तो फूटा केसे?
मियां, फिर पता चला के डेम की दीवार पानी का दबाव नई झेल पाई। ताबड़तोड़ आसपास के 16 गांव खाली कराए गए। आजादी के अमरित महोत्सव के माहोल में पूरी मधपिरदेश सरकार ओर मुखमंतरी शिवराजसिंह चोहान 24 घंटे लोगों को बाढ़ से बचाने के काम की निगरानी करते रिए। रात दिन जूझने के बाद डेम से एक नहर निकाली गई ओर डेम का पानी होले-होले खाली करा लिया गया। हजारों लोगों के जान माल की हिफाजत हो गई। सबने राहत की सांस ली। हल्ला हुआ के ये आखिर हुआ केसे? कोन इसके लिए जिम्मेवार हेगा? उसे सजा कब मिलेगी? वगेरा।
उधर मुखमंतरी बार-बार केते रिए के जो मुजरिम होगा, उसपे कड़ी कार्रवाई होगी। चार लोगों की जांच बिठा दी गई। कमेटी ने 10 मिनट की जांच के बाद पूरी रिपोट सरकार को सोंप दी। अभी तक ये खुलासा नई हो रिया के जिसे डेम बनाने का ठेका दिया गया था, उसका मालिक असल में हे कोन?
खां, इस पूरे मामले में लीपा-पोती का खुटका तो पेले ई लग रिया था। जिस कंपनी को डेम बनाने का ठेका मिला था, उसने किसी दूसरी छोटे ठेकेदार को काम पकड़ा दिया। छोटे ठेकेदार ने पेसा बचाने की नीयत से 210 दिन का काम 90 दिन में निपटा दिया। ये सोच के के तलवार का काम चाकू से चल जाएगा। बांध की पक्की मजबूत दीवार की जगा मिट्टी की दीवार तान दी। इत्ता बड़ा ओर खुले आम हो रिया फर्जीवाड़ा कोई को भी नई दिख रिया था। अब बात चल रई हे के डेम बनाने वाली कंपनी के बिलेकलिस्ट कर दिया हेगा ओर सिंचाई महकमे के छोटे अफसरों का गला पकड़ा जाएगा। मगर इस डेम में जनता के टेक्स के 304 करोड़ रू. डूब गए, उसे कोई नई देख रिया।
इंतेहा तो ये हे के खां, मुसीबत गुजर जाने के बाद सरकार ये के रई हेगी के जो फूटा वो डेम था ई नई, वो तो तालाब हेगा। ओर तालाब के फूटने पे इत्ता सियापा करने का क्या मतलब? तालाब तो फूटते ई रेते हें। बारिश खतम होते ई सब ठीक हो जाएगा। काय की जांच ओर काय की कार्रवाई। कांगरेस पूछ रई हे के अगर वो तालाब था तो जांच कमेटी ने जांच किस बात की करी? अब मियां, गजब ये हेगा कि मधपिरदेश में तालाब की लागत भी 3 सौ करोड़ से ज्यादा की बेठ रई हे। इतने महंगे तालाब ओर भी कच्ची दीवाल वाले..। अपना एमपी भी गजब हे खां।
- बतोलेबाज
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