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भोपाल में स्वच्छता की बड़ी परीक्षाः सिटीजन फीडबैक के साथ 45 दिन का सर्वे कल से, सेकंड रैंक बचाने की चुनौती

Thu, 09 Apr 2026 07:11 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल

सार

भोपाल में 10 अप्रैल से शुरू हो रहा 45 दिन का स्वच्छता सर्वे इस बार सिटीजन फीडबैक और सख्त जांच के चलते बेहद निर्णायक बन गया है। पिछली बार की सेकंड रैंक को बरकरार रखने के लिए नगर निगम को जमीनी स्तर पर तेजी से सुधार करना होगा, वरना शहर की साख पर असर पड़ सकता है।
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बीएमसी भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 राजधानी भोपाल में 10 अप्रैल से शुरू हो रहा 45 दिन का स्वच्छता सर्वे इस बार बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इस सर्वे में सिटीजन फीडबैक को सबसे ज्यादा अहमियत दी गई है, यानी अब शहर की रैंकिंग सिर्फ कागजी दावों पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अनुभव और जमीनी हकीकत पर तय होगी। ऐसे में नगर निगम के लिए यह किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।भोपाल ने पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण में देश के बड़े शहरों की श्रेणी में दूसरा स्थान हासिल कर बड़ी उपलब्धि दर्ज की थी। इस उपलब्धि ने शहर की पहचान को मजबूत किया, लेकिन अब उसी स्तर को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस बार न सिर्फ प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया भी ज्यादा सख्त हो गई है।
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अंदरूनी सर्वे में सामने आई चिंताजनक स्थिति
नगर निगम द्वारा हाल ही में कराए गए आंतरिक सर्वे ने जमीनी स्तर की कई खामियों को उजागर कर दिया है। शहर के जोन 1, 4, 5, 8, 9, 10, 11, 12, 14, 15, 17 और 19 में सफाई व्यवस्था अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाई गई। कई स्थानों पर नियमित कचरा उठाव नहीं हो रहा है। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन में अनियमितता है। निगरानी और सुपरविजन सिस्टम कमजोर पड़ा है। इन स्थितियों ने यह साफ कर दिया है कि कागजों में दिख रही साफ-सफाई और वास्तविक हालात में बड़ा अंतर है, जो सर्वे के दौरान शहर की रैंकिंग को प्रभावित कर सकता है।

45 दिन तक चलेगा व्यापक रियलिटी चेक
10 अप्रैल से शुरू होकर यह सर्वे 45 दिनों तक चलेगा, जिसमें शहर के हर छोटे-बड़े पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी। इसमें सड़कों, कॉलोनियों, बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, शौचालयों, कचरा प्रबंधन व्यवस्था और झीलों की स्वच्छता को परखा जाएगा। हर पैरामीटर पर अंक दिए जाएंगे, जो अंत में शहर की रैंकिंग तय करेंगे।
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सिटीजन फीडबैक बनेगा सबसे बड़ा गेमचेंजर
इस बार सर्वे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सिटीजन फीडबैक है। मोबाइल ऐप और फोन कॉल के माध्यम से लोगों की राय ली जाएगी। सर्वे टीम सीधे नागरिकों से बातचीत करेगी और लोगों के अनुभव के आधार पर अंक दिए जाएंगे। यानी अब शहर की असली तस्वीर जनता ही सामने लाएगी और वही रैंकिंग तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

केंद्र की टीम करेगी गोपनीय निरीक्षण
सर्वे के दौरान 16 अप्रैल से 31 मई के बीच केंद्र सरकार की टीम किसी भी समय भोपाल पहुंच सकती है। यह टीम बिना किसी पूर्व सूचना के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर निरीक्षण करेगी।जिसमें डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की स्थिति। कचरा प्रोसेसिंग प्लांट और डंपिंग साइट देखेगी और सार्वजनिक शौचालय और अन्य सुविधाओं के साथ-साथनागरिकों से सीधा संवाद भी करेगी। टीम का निरीक्षण पूरी तरह गोपनीय होगा, जिससे वास्तविक स्थिति का सही आकलन किया जा सके।
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रैंकिंग पर मंडरा रहा खतरा
भोपाल ने पिछले कुछ वर्षों में स्वच्छ शहर के रूप में अपनी पहचान बनाई है, लेकिन इस बार की चुनौतियां अलग हैं। तेजी से बढ़ती आबादी, बढ़ता कचरा और कई इलाकों में कमजोर ग्राउंड मैनेजमेंट शहर की रैंकिंग को प्रभावित कर सकते हैं। इस बार की सबसे खास बात यह है कि शहर की रैंकिंग काफी हद तक आम नागरिकों के फीडबैक पर निर्भर करेगी। अगर लोगों को अपने क्षेत्र की सफाई संतोषजनक नहीं लगी, तो इसका सीधा असर रैंकिंग पर पड़ेगा।

 
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