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कर्मचारियों की महाक्रांति रैली: भोपाल में जुटे कर्मचारी,बोले- वादों से थक चुके, अब हम चाहते हैं हक की गारंटी

Sun, 12 Oct 2025 07:18 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल में रविवार को बैंक मित्र, पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, अंशकालीन भृत्य, राजस्व सर्वेक्षक, आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों ने 'महाक्रांति रैली' निकालते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा है कि हम वादों से थक चुके हैं, अब हम अपने हक की गारंटी चाहते हैं।
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भोपाल में कर्मचारियों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी भोपाल में रविवार को विभिन्न विभागों में कार्यरत बैंक मित्र, पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, अंशकालिक कर्मचारी, राजस्व सर्वेक्षक, आउटसोर्स और संविदा कर्मियों ने एकजुट होकर विशाल 'महाक्रांति रैली' निकाली। संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था अब ठेका और आउटसोर्स कंपनियों के भरोसे चल रही है। विशेषकर क्लास-3 और क्लास-4 श्रेणियों के पदों पर सीधी नियुक्तियों की जगह कंपनियों के माध्यम से काम कराया जा रहा है। यह प्रदर्शन तुलसी नगर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क में हुआ। यह आंदोलन आल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थायी, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा, मध्यप्रदेश के बैनर तले हुआ, जिसे 'महाक्रांति रैली' नाम दिया गया है।
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वादे नहीं, अधिकार की गारंटी चाहिए
संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि प्रदेश भर के उन हजारों कर्मियों की सामूहिक आवाज़ है जो वर्षों से अस्थायी सेवा और आर्थिक असमानता झेल रहे हैं। हम वादों से थक चुके हैं, अब हम अपने हक की गारंटी चाहते हैं। इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से रजत शर्मा (बैंक मित्र संगठन), वीरेंद्र गोस्वामी (राजस्व सर्वेक्षक संघ),राजभान रावत (पंचायत चौकीदार संघ), उमाशंकर पाठक (अंशकालीन कर्मचारी संघ),मनोज उईके, डॉ. अमित सिंह, शिवेंद्र पांडे शामिल रहे। 



कर्मचारियों का शोषण, वेतन में कटौती और विलंब
उपाध्य उमाशंकर पाठक ने बताया कि कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को 40 हजार के नाम पर रखा जा रहा है, लेकिन असल में उन्हें 22 हजार रुपए भी समय पर नहीं मिलते। कई कर्मचारियों को 3-4 महीने बाद भुगतान होता है, जिससे उनका पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
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न्याय के लिए कोर्ट की शरण लेंगे
संघ के नेताओं ने कहा कि अब वे इस मुद्दे को हाईकोर्ट में याचिका के जरिए उठाएंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का हवाला देते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को दोहराया। संयुक्त मोर्चा के अनुसार यह प्रदर्शन पिछले दो वर्षों से प्रस्तावित था लेकिन अब जाकर 12 अक्टूबर के लिए अनुमति मिल सकी। इससे पहले ऐसा ही बड़ा प्रदर्शन 2023 में हुआ था।

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संघ संगठनों की मुख्य मांगे
सभी अस्थायी, आउटसोर्स, अंशकालिक और संविदा कर्मियों को रिक्त पदों पर नियमित किया जाए
समान कार्य के लिए समान वेतन की नीति तुरंत लागू की जाए
आउटसोर्सिंग और ठेका प्रणाली समाप्त की जाए
बैंक मित्रों को सीधे बैंक से जोड़ा जाए
राजस्व सर्वेक्षकों को नियमित वेतन और स्थायी रोजगार मिले

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दी कानूनी ताकत
वासुदेव शर्मा ने बताया कि 19 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील क्रमांक 8558/2018 में कहा है कि समान कार्य के लिए असमान वेतन देना श्रमिक शोषण है। यह फैसला अस्थायी और संविदा कर्मियों के लिए एक नई आशा की किरण है। संयुक्त मोर्चा का कहना है कि प्रदेश में दो दशकों से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सीधी भर्तियां रुकी हुई हैं। कार्यभार इन्हीं अस्थायी कर्मियों से उठवाया जा रहा है। ये स्थिति संविधान और श्रम कानूनों के खिलाफ है।
 
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